मन की आंखों से क्या वाकई देखा जा सकता है

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आम बोलचाल में कहा जाता है- दांत गए स्वाद गया, नैन गए जहान गया. ज़ाहिर है जिसकी आंखों में रोशनी नहीं, उसकी दुनिया में सिर्फ और सिर्फ अंधेरा है.

लेकिन अंधेरा होने के बावजूद कुछ ऐसे लोग भी हैं जो काम करने के मामले में उन लोगों से कम नहीं होते जो देख सकते हैं. इसमें कोई शक नहीं कि कुछ काम करने में उन्हें मुश्किल आती है. इसके बावजूद वो किसी के मोहताज नहीं होते.

जिनको दिखाई नहीं देता, उनके बारे में कहा जाता है कि वो मन की आंखों से देखते हैं. यूं तो ये हौसला बढ़ाने वाली बात होती है. मगर, दुनिया में कई लोग ऐसे हैं जो वाक़ई मन की आंखों से देख पाते हैं.

आंखें बोलती तो हैं, मगर क्या?

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ऐसी ही एक महिला हैं स्कॉटलैंड की मिलिना कनिंग. कनिंग की आंखों की रोशनी बीस बरस की उम्र में चली गई थी. बीमारियों की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें 52 दिनों तक कोमा में रखा. जब वो कोमा से बाहर आईं तो उनकी आंखों की देखने की ताक़त जा चुकी थी.

इससे पहले कभी उन्हें देखने में कोई दिक़्क़त नहीं थी. डॉक्टरों का कहना है कि कोमा के दौरान, मिलिना को एक ब्रेन स्ट्रोक हुआ था. इसके चलते उनकी आंखों की रोशनी चली गई. अब वो कभी देख नहीं सकती थी.

लेकिन ठीक होने के छह महीने बाद हालात बदलने लगे. मिलिना कहती हैं कि उन्हें रंग नज़र आने लगे थे. लेकिन उनकी बातों का कोई यक़ीन नहीं करता था.

दुनिया में चंद लोग ऐसे हैं जो किसी को देख नहीं सकते. लेकिन, अपने आस-पास मौजूद सामान को देख सकते हैं. अंग्रेज़ी भाषा में इस अवस्था को ब्लाइंडसाइट कहा जाता है. ऐसे लोगों को उनका सुप्त दिमाग आसपास की चीज़ों से आगाह कराता रहता है.

मिलिना अपनी बीमारी को और समझने के लिए ब्रिटेन के मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट गॉर्डन डटन से मिलीं. डॉक्टर गॉर्डन ने पहली नजर में ही मिलिना को बता दिया कि उन्हें ब्लाइंडसाइट है. डॉक्टर गॉर्डन ने मिलिना के बहुत से टेस्ट किए.

एक टेस्ट के तहत उन्होंने गलियारे में कई कुर्सियां रखकर मिलिना को उनके बीच से होकर अपनी आम चाल में चलने को कहा. नॉर्मल चाल चलते हुए मिलिना उन कुर्सियों के बीच से चलीं, तो हर बार वो टकरा गईं.

डॉक्टर गॉर्डन ने दूसरी बार उन्हें तेज़ रफ़्तार से गुज़रने को कहा. इस बार वो किसी कुर्सी से टकराए बिना कॉरिडोर से गुज़र गईं. मिलिना कहती हैं वो ऐसा इसलिए कर पाईं क्योंकि उन्हें वहां कुर्सियां होने का एहसास हो रहा था.

मिलिना अपने घर में भी आसानी से चल-फिर लेती हैं. घर के काम भी कर लेती हैं. यहां तक कि अगर कमरे में कोई चीज पड़ी हो तो उसका एहसास भी उन्हें हो जाता है. उनके पास कोई बैठा हो, तो, उसे वो महसूस कर सकती हैं. लेकिन उस शख्स को देख नहीं सकतीं.

अपने आस-पास चीज़ों का एहसास उनके ज़हन में उसकी तस्वीर उभार देता है जिससे उन्हें लगता है कि वो चीजें देख सकती हैं. लेकिन असल में उनकी आंखों में अंधेरा ही है.

क़ुदरत इंसान के साथ तमाम अनोखे खेल खेलती है. उनमें से एक की मिसाल मिलिना हैं. वो देख नहीं पातीं, मगर अपने आस-पास की चीज़ें महसूस कर लेती हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख यहां पढ़ें, जो बीबीसी फ़्यूचर पर उपलब्ध है.)

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