आर्मी राशन ने बदला आपका खाना

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हर देश की रक्षा के लिए जवान सरहदों पर तैनात रहते हैं. सैनिक एक ही इलाक़े और एक ही जगह पर कई कई दिन तक रहते हैं. कभी आपने सोचा है कि ऐसे मुश्किल हालात में उनके खाने का इंतज़ाम कैसे होता होगा?

बॉर्डर पर खड़े जवानों को दिन भर मे क़रीब 4 हज़ार कैलोरी ताक़त की ज़रूरत होती है. यानी उनका खाना ताक़त देने वाला होना चाहिए. और उसमें स्वाद भी होना चाहिए.

इतने दूर-दराज़ के इलाक़ों में रोज़ कोन चूल्हे पर स्वादिष्ट खाना पकाए और जवानों को परोसे. सैनिकों का खाना ऐसा हो, जो कई दिन धूप और ठंड या ख़राब मौसम में भी ख़राब न हो. जब सैनिक उसे खाएं तो उन्हें पूरा पोषण मिले.

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इसके लिए पूरी दुनिया में सैनिकों के खाने को लेकर काफ़ी रिसर्च की गई. और इस रिसर्च ने ना सिर्फ़ सैनिकों के खाने के लिए आसानी पैदा की, बल्कि आज आप और हम जैसे आम लोग जिन सीलबंद खानों का इस्तेमाल करते हैं, वो भी उस रिसर्च की ही देन है.

युद्ध और खाना

नेपोलियन के ज़माने में हुए युद्ध के दौरान फ्रांस की सरकार ने अपने सैनिकों के लिए ऐसा खाना तैयार करने पर ज़ोर दिया था, जिसे कई दिनों तक रखा जा सके. तभी से सीलबंद और कांच के जार में पैक्ड खाने वजूद में आए.

मिलिट्री के लोगों के लिए ऐसे खाने की ज़रूरत होती है, जिसे साथ रखना आसान हो. और वो लंबे समय तक सही सलामत रह सके. तेज़ गर्मी और सर्दी के मौसम में भी ये खाना हफ़्तों तक सही रहना चाहिए. साथ ही उस खाने में अधिक मात्रा में कैलोरी मौजूद होनी चाहिए.

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रिसर्चर अनस्तासिया मार्क्स दा साल्सिडो कहती हैं कि फ़ौजियों के खाने में एक चीज़ सबसे अहम होती है वो है ब्रेड.

उनका कहना है कि जैसे ही आप ब्रेड को गर्म करते हैं उसका स्टार्च जिसे एमेलोस कहा जाता है, फैलना शुरू हो जाता है और वो डबल रोटी को सख्त करना शुरू कर देता है.

एमेलोस को अमेलेसिस एंज़ाइम के ज़रिए हटाया भी जा सकता है. लेकिन तापमान बढ़ते ही उनकी क्वालिटी ख़राब होने लगती है.

ब्रेड की थ्योरी

बीसवीं सदी में अमरीकी सेना के खाने पर रिसर्च करने वाले शोधकर्ताओं ने पाया कि एमेलेसिस एंज़ाइम गर्मी बर्दाश्त करने वाले बैक्टीरिया से ही आते हैं. अगर ब्रेड को पकाते समय ही इन्हें अलग किया जाए, तो ब्रेड लंबे समय तकर ताज़ा रखा जा सकता है.

आज जो ब्रेड सुपरमार्केट में मिलती है वो इसी रिसर्च का नतीजा है. रिसर्चर साल्सिडो का कहना है आज जो पैक्ड ख़मीर हमें बाज़ार में मिलता है उसके पीछे भी यही थ्योरी काम करती है.

खाने से नमी को दूर करके उसे लंबे समय तक ताज़ा रखने का तरीका भी आर्मी के खाने पर की जाने वाली रिसर्च से ही सामने आया है. खाने से नमी को निकालने का ये मतलब नहीं है कि उससे खाने की क़ुदरती नमी को भी हटा दिया जाए.

नमी हटाने का मतलब है कि खाने को सिर्फ उस प्वाइंट तक ही सुखाया जाए जिसमें कि उसमें बैक्टीरिया न पनप सके. खाने को सुरक्षित रखने की ये तकनीक आज सेना के लिए तैयार किए जाने वाले खाने में भी अपनाई जाती है और आम लोगों के खाने में भी.

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हाईप्रेशर पर खाना पकाना

इसके अलावा एक तकनीक और अपनाई जाती है. खाने को आग पर न पका कर उसे हाई प्रेशर पर तैयार किया जाए, तो भी खाना लंबे समय तक ताज़ा रह सकता है. हाईप्रेशर पर पकाने से खाने के सूक्ष्म जीवाणु फटकर ख़त्म हो जाते हैं.

इस तरह खाना पूरी तरह से कीटाणुरहित बन जाता है. आज सेना का खाना तैयार करने में इस तकनीक का खूब इस्तेमाल हो रहा है.

आज सुपर मार्केट में घूमते वक़्त जब आपको तमाम पैकेटबंद सामान दिखें, तो जानिए कि इसके लिए फौज के खाने पर रिसर्च ने कमाल किया है.

अलग अलग देशों के फौजियों को उनके यहां के खाने के रिवाज के मुताबिक पैकेज्ड फूड दिया जाता है. और इन्हीं से मुश्किल हालात में खड़े हमारे जवानों को मदद मिलती है.

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