'उस दौर में हम 'सेक्स नहीं करते' थे'

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ये 1986 की बात है जब मिखाइल गोर्बाचोव के नेतृत्व में सोवियत संघ में कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर पुनर्गठन की राजनीतिक मुहिम शुरू हो चुकी थी और सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर सोवियत संघ बातचीत के दरवाजे खोल रहा था.

इसी सिलसिले में उस साल जून में सोवियत संघ के लोगों को अमरीकियों से खुलकर बातचीत का पहली बार मौका दिया गया था.

ये बातचीत तब के लेनिनग्राद शहर (अब सेंट पीट्सबर्ग) और अमरीका के बोस्टन में बैठे दो समूहों के बीच सैटेलाइट के ज़रिए बात हुई थी.

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सोवियत संघ

इसका प्रसारण दोनों देशों में टीवी पर हुआ था. इसमें कोई शक नहीं है कि अब कम ही लोग ऐसे होंगे जिन्हें वो मुलाकात याद होगी.

लेकिन कई रूसी लोगों को ये याद है कि उस दिन किसी ने कहा था, "सोवियत संघ में हम सेक्स नहीं कर सकते थे."

30 बरस बीत गए हैं, लेकिन जब भी कभी सोवियत संघ के दिनों के प्रोपेगैंडा की इंतेहा का ज़िक्र होता है, वो बात ज़ुबां पर आ ही जाती है.

बीबीसी के रेडियो प्रोग्राम विटनेस में पिछले दिनों इस ऐतिहासिक मौके के गवाह रहे लोगों से उस दिन के बारे में पूछा गया.

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Image caption मिखाइल गोर्बाचोव के शासन में अमरीकी और सोवियत महिलाओं के बीच ये संवाद हुआ था

सांस्कृतिक मतभेद

वो एक गैरमामूली बात थी. मकसद था अलग-अलग देशों की महिलाओं के बीच संवाद हो. लेकिन सोवियत संघ में तनाव का माहौल था.

लेनिनग्राद टेलीविज़न स्टूडियो में 200 से ज्यादा महिलाएं इकट्ठा हुई थीं. ये वो महिलाएं थीं जो न कभी विदेश ही गई थीं और न ही किसी विदेशी व्यक्ति को जानती थीं.

ट्रांसलेटर की मदद से दोनों देशों की महिलाओं को एक-दूसरे से सवाल पूछने थे और एक-दूसरे के जवाब समझने थे. ये रिकॉर्डिंग चार घंटों तक चली.

लेकिन जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ता गया, सांस्कृतिक मतभेद गहराने लगे और अचानक एक अमरीकी महिला के सवाल ने सबको चौंका दिया.

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चौंकाने वाला सवाल

वो सवाल कुछ यूं था, "हमारे देश में टीवी पर आने वाले कई कमर्शियल विज्ञापनों में सेक्स दिखाया जाता है, क्या आप लोगों को भी इस समस्या का सामना करना पड़ता है."

जवाब देने के लिए लुडमिला इवानोवा नाम की एक सोवियत महिला खड़ी हुईं.

वो सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी की कार्यकर्ता थीं, सरकारी टूरिज़्म कंपनी में काम करती थीं और सोवियत वूमेंस कमिटी की मेंबर भी थीं.

उन्होंने कहा, "हम सेक्स नहीं करते और हम सेक्स के ख़िलाफ़ हैं." उनकी बात सुनकर कुछ सोवियत महिलाओं की हंसी छूट गई.

तभी बगल में बैठी महिला ने इवानोवा की बात को दुरुस्त करते हुए कहा, "हां, हम सेक्स करते हैं लेकिन हमारे यहां टीवी पर कमर्शियल विज्ञापन नहीं दिखाए जाते."

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'सेक्स कोई गंदी बात'

इस टीवी शो में सोवियत पक्ष के प्रोग्राम होस्ट व्लादिमीर पोजनर फ़ौरन बोल पड़े, "ये ग़लत है." और उन्होंने विषय बदल दिया.

हालांकि बाद में इस बात को लेकर न तो कोई सफ़ाई ही दी गई और न ही ये बात बढ़ी. लेकिन इवानोवा की बात लोगों के मन में कहीं ठहर-सी गई.

इवानोवा अब बर्लिन में रहती हैं और उन्होंने बीबीसी विटनेस से कहा, "हममें से किसी ने उस शब्द का इस्तेमाल किया था. हम केवल अंदाज़ा लगा सकते थे कि उनका क्या मतलब है जब उन्होंने सेक्स के बारे में बात की. हम समझते थे कि सेक्स कोई गंदी बात है."

वो आगे कहती हैं, "जब मुझे माइक्रोफोन मिला तो मैंने कहा, वी डोंट हैव सेक्स, वी जस्ट हैव लव. लेकिन रिकॉर्डिंग से लव शब्द हटा दिया गया."

इवानोवा को ये भी याद है कि वहां मौजूद लोग किस तरह से उनकी बात पर हंस पड़े थे. हालांकि उस वक्त वो उत्साहित थीं, लेकिन उन्हें एहसास था कि वो ग़लत कह गईं.

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Image caption अस्सी के दशक में सोवियत संघ में सेक्स एक वर्जित विषय था जिसके बारे खुलकर बातचीत नहीं की जाती थी

कम्युनिस्ट पार्टी

उन्होंने कहा, "मैं डर गई थी. मुझे एहसास हुआ कि मैंने कुछ ग़लत कह दिया है और इसके नतीजे हो सकते हैं. और ये हुआ भी."

कम्युनिस्ट पार्टी और उनके बॉस और यहां तक कि सोवियत वूमेंस कमिटी ने सेक्स वर्ड का इस्तेमाल करने पर फटकार लगाई.

इवानोवा बताती हैं, "उन्होंने मुझसे कहा कि एक सम्मानित, शादीशुदा और मेहनती महिला ऐसे शब्द का इस्तेमाल कैसे कर सकती है."

बीबीसी विटनेस के इसी प्रोग्राम में उस टेलीविजन शो के होस्ट व्लादिमीर पोजनर ने बताया, "हमें इसके संदर्भ को समझना होगा. वो अस्सी के दशक के बीच का समय था. सोवियत संघ वजूद में था और कम्युनिस्ट पार्टी हुकूमत में थी. आपको सियासी चुटकुला सुनाने की वजह से भी जेल भेजा जा सकता था."

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Image caption व्लादीमिर पोजनर उस टेलीविजन शो के होस्ट थे

सोवियत संघ का विघटन

पोजनर ये भी मानते हैं कि इवानोवा के शब्दों को ग़लत अर्थों में लिया गया. उनके अनुसार इवानोवा ने कहा था, "हम टीवी पर सेक्स नहीं करते.

इवानोवा आज भी अपने कहे पर कायम हैं. उन्होंने कहा, मैंने कहा था कि हम सेक्स नहीं करते और ये बात सही है. आधिकारिक रूप से किसी ने भी कभी सेक्स पर बात नहीं की थी.

दस सालों तक इवानोवा इस मुद्दे पर खामोश रहीं. सोवियत संघ के विघटन के बाद अपने इसी स्टेटमेंट का उन्होंने निजी फ़ायदे के लिए इस्तेमाल किया और महिलाओं का इसी नाम से एक क्लब बनाया.

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