हमारे गिरे-पड़े रहने से...तरक्की कैसे होगी?
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हमारे गिरे-पड़े रहने से तरक्की कैसे होगी?

  • 7 मई 2017

लगभग 115 साल पहले बंगाल में रुक़ैया के लिखे पर लोगों की नज़र ठहरने लगी थीं.

देखते ही देखते वो बांग्‍ला अदब की दुनिया में जाना-माना नाम हो गईं. वे अब रुक़ैया सख़ावत हुसैन या आरएस होसैन थीं.

उनकी एक मशहूर रचना है- 'स्‍त्रीजातिर अबोनीति' यानी स्‍त्री जाति की अवनति. ऊपर के सवाल इसी रचना से हैं.

विडियो क्रेडिट: शैलेंद्र कुमार

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