हमारे गिरे-पड़े रहने से...तरक्की कैसे होगी?
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हमारे गिरे-पड़े रहने से तरक्की कैसे होगी?

लगभग 115 साल पहले बंगाल में रुक़ैया के लिखे पर लोगों की नज़र ठहरने लगी थीं.

देखते ही देखते वो बांग्‍ला अदब की दुनिया में जाना-माना नाम हो गईं. वे अब रुक़ैया सख़ावत हुसैन या आरएस होसैन थीं.

उनकी एक मशहूर रचना है- 'स्‍त्रीजातिर अबोनीति' यानी स्‍त्री जाति की अवनति. ऊपर के सवाल इसी रचना से हैं.

विडियो क्रेडिट: शैलेंद्र कुमार

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