दो यतीम भाई-बहन और उनके 1 लाख के पुराने नोट
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यतीम भाई-बहन और एक लाख के पुराने नोट

राजस्थान के कोटा शहर में ‘मधुस्मृति बालगृह’ में रह रहे दो यतीम बच्चे सूरज और उसकी बहन सलोनी को 17 मार्च को सहरावदा गाँव स्थित अपने घर से पुराने नोटो में 96,500 रुपए मिले.

ये पैसे सूरज और सलोनी की माँ ने उनके भविष्य के लिए बचा रखे थे जिनकी 2013 में हत्या हो गई थी. सूरज और सलोनी दोनों नाबालिग थे, इसलिए उन्हें बालगृह भेज दिया गया.

96,500 रुपयों के पुराने नोटों में 149 नोट 500 के और 22 नोट 1000 रुपए के हैं.

पुराने नोटों को बदलने की मियाद 31 दिसंबर 2016 को ख़त्म हो चुकी थी. इसलिए बाल कल्याण समिति, कोटा के अध्यक्ष हरीश गुरबख्शानी ने जयपुर में आरबीआई के रीजनल कार्यालय से नोट बदलने की गुज़ारिश की. लेकिन नियमों का हवाला देकर आरबीआई ने नोटों को बदलने में अपनी असमर्थता ज़ाहिर की.

चूंकि ये पैसे दो यतीम बच्चों के थे, इसलिए हरीश गुरबख्शानी ने मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने लाने के लिए 26 मार्च को पीएमओ को चिट्ठी लिखी.

उन्होंने वित्त मंत्रालय, आरबीआई (दिल्ली) समेत कई जगहों पर पुराने नोटों को बदलने के लिए चिट्ठियां लिखीं.

पिछले दिनों उन्हें पीएमओ से अपनी चिट्ठी का जवाब मिला जिसमें मामले पर गौर करने का आश्वासन दिया गया है. कोटा से लौटकर आरजू आलम की रिपोर्ट