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एड्स पीड़ितों को बड़ी राहत, अब एक दवा काफी

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30 जून 2012 03:50 IST
एचआईवी

एचआईवी एड्स से पीड़ित रोगियों के लिए काफी राहत की खबर है. एचआईवी से पीड़ित रोगियों के लिए एक ऐसी दवा तैयार की गई है जिसमें चार दवा शामिल है.

अब इस दवा को दिन भर में चार बार खाने की बजाए सिर्फ एक बार खाना पड़ेगा.

लैंसेट में प्रकाशित हाल के एक शोध में बताया गया है कि यह दवा एचआईवी रोगियों के लिए बहुत लाभदायक साबित हो सकती है.

इंग्लैंड के विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘महान दवा’ एचआईवी से प्रभावित लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है क्योंकि अब रोगियों को यह दवा दिन में सिर्फ एक बार खानी पड़ेगी.

एचआईवी ऐसी बीमारी है जो लाइलाज है लेकिन इसके कीटाणुओं को विभिन्न प्रकार की दवा और उपचार से नियंत्रित किया जा सकता है.

शोधकर्ताओं और दवा निर्माताओं ने कई दवाओं को मिलाकर ये दवा बनाई है जिसे दिन में एक बार भी खाने से काम चल सकता है.

शोधार्थियों का कहना है कि यह पहली एचआईवी निरोधक दवा है जिसका नाम ‘इंटिग्रेस आई सेफ’ है जो बहुत ही कामयाब है.

बोस्टन के ब्रिघम एंड वूमेन हॉस्पिटल के क्लिनिकल निदेशक और मेसेच्युसेट्स स्थित हार्वड मेडिकल स्कूल के एसोसिएट प्रोफेसर पॉल सैक्स का कहना है, “एचआईवी रोगियों को दवा पर सबसे ज्यादा भरोसा रहता है, लेकिन अगर उसका एक खुराक भी छूट जाता है तो संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो जाता है.”

उन्होंने एचआईवी पीड़ित 700 रोगियों के ऊपर किए जा रहे इलाज को देखकर इसका विश्लेषण किया है. पॉल सैक्स का कहना है यह दवा काफी सुरक्षित और असरकारी है, हालांकि इस दवा के सेवन से किडनी की समस्या हो जाती है.

पॉल सैक्स का कहना है, “हमारे परिणाम से पता चलता है कि एचआईवी के मरीजों का बेहतर ढ़ंग से इलाज हो सकता है, जिसमें कई दवाओं को मिलाकर एक दवा से भी इलाज किया जाना शामिल है.”

बर्मिघम हर्टलैंड अस्पताल के एचआईवी विशेषज्ञ डॉक्टर स्टीव टेलर का कहना है, “इस बात में कोई शंका ही नहीं है कि दिन में एक बार दवा दिए जाना एचआईवी पीड़ित मरीजों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है. एड्स के इलाज में हम इतना आगे निकल आए हैं कि एक समय दिन में तीन बार चालीस-चालीस गोली लेनी पड़ती थी अब इसके लिए सिर्फ एक गोली लेनी पड़ती है.”

डॉक्टर स्टीव टेलर का कहना है दिन भर में एक गोली दिया जाना बड़ी खबर है और भविष्य में एड्स के मरीजों को इलाज कराने में और अधिक सुविधा होगी.

लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि बहुत से एचआईवी के मरीजों को पता ही नहीं है कि वो एड्स के मरीज हैं.

इसी तरह इंगलैंड के एक चौथाई मरीज को मालूम नहीं है कि उन्हें एड्स है और वे उसकी दवा ले रहे है.

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