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हबीब तनवीर से बातचीत

जानेमाने रंगकर्मी हबीब तनवीर का आठ जुलाई को निधन हो गया. वे 85 वर्ष के थे और लंबे समय से बीमार थे.

आगरा बाज़ार और चरनदास चोर जैसे नाटकों के लिए मशहूर हबीब तनवीर ने भोपाल में अंतिम साँस ली.

मशहूर नाटककार होने के साथ-साथ हबीब तनवीर निर्देशक, कवि और अभिनेता भी थे. हबीब तनवीर को कविता लिखने का शौक था और वर्ष 1945 में मुंबई पहुँचकर उन्होंने अपने शौक का भरपूर फ़ायदा उठाया.

(बीबीसी संवाददाता पाणिनी आनंद ने कुछ माह पहले हबीब तनवीर साहेब से कई अहम मुद्दों पर लंबी बातचीत की. यहाँ उनको याद करते हुए हम इसी बातचीत के कुछ ख़ास हिस्से आपको सुनवा रहे हैं.)

हबीब तनवीर ने ऑल इंडिया रेडियो, मुंबई के लिए काम भी किया और साथ ही हिंदी फ़िल्मों के लिए गाने भी लिखे. कुछ फ़िल्मों में उन्हें अभिनय का भी मौक़ा मिला.

यहीं वे प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े और फिर भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) में भी शामिल हुए.

वर्ष 1954 में हबीब दिल्ली आ गए और हिंदुस्तान थियेटर से जुड़े और कई नाटक लखे. इसी साल उन्होंने अपने मशहूर नाटक आगरा बाज़ार का मंचन किया.

इसके बाद हबीब तनवीर ने मुड़ कर नहीं देखा. इंग्लैंड जाकर निर्देशन और अभिनय का प्रशिक्षण लिया. वहाँ से लौटकर उन्होंने भोपाल में नया थियेटर बनाया.

इस थियेटर के माध्यम से उन्होंने लोक कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया.