'देव आनंद मुझ पर फ़िल्म बनाने वाले थे'

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ब्रितानी सांसद शैलेश वारा से मिलने के बाद एवरग्रीन स्टार देव आनंद को लगा कि उनका जीवन किसी फ़िल्मी कहानी के प्लॉट जैसा है, जिस पर फ़िल्म बनाई जानी चाहिए.

पोरबंदर से युगांडा गए एक बढ़ई के परिवार में पैदा हुए शैलेश 1964 में चार साल की उम्र में ब्रिटेन आए थे, पेशे से वकील वारा न सिर्फ़ अँगरेज़ बहुल सीट से चुनाव जीतकर हाउस ऑफ़ कॉमन्स में पहुँचे, बल्कि संसद में विपक्ष के उपनेता भी बने.

विपक्षी टोरी पार्टी के 'राइजिंग स्टार' कहे जाने वाले वारा पार्टी के उपाध्यक्ष रह चुके हैं और इस समय शैडो मिनिस्टर हैं, उनकी पार्टी के इतिहास में पहली बार भारतीय मूल का कोई व्यक्ति शैडो मिनिस्टर बना है. हमेशा मुस्कुराते रहने वाले छह फुट लंबे वारा कहते हैं, "देव आनंद साहब ने फ़िल्म तो नहीं बनाई लेकिन उनसे मिलकर बहुत मज़ा आया."

फ़िल्म की बात आगे नहीं बढ़ी लेकिन वारा की कहानी तेज़ी से आगे बढ़ रही है क्योंकि अगले साल गर्मियों में होने वाले चुनाव में उनकी पार्टी की जीत के आसार दिख रहे हैं. वे कहते हैं, "मैं शैडो मिनिस्टर हूँ, शैडो कैबिनेट का तरीक़ा भारत में नहीं है, लेकिन यहाँ ब्रिटेन में विपक्षी पार्टी का एक पूरा मंत्रिमंडल होता है, और अगर कल हम चुनाव जीतते हैं तो यह एक तरह से तैयार मंत्रिमंडल है जो सत्ता संभाल सकता है."

महत्वाकांक्षा

ओबामा की तरह ब्रिटेन में सत्ता के शीर्ष पहुँचने की महत्वाकांक्षा के बारे में पूछे जाने पर वारा कहते हैं, "राजनीति में, ख़ास तौर पर ब्रिटेन की राजनीति में हर दिन को उसी दिन के हिसाब से जीना चाहिए. राजनीति ऐसा पेशा है जिसमें आप अक्सर हिचकोले खाते रहते हैं इसलिए आपको हमेशा अपने पैर ज़मीन पर रखने चाहिए."

पैर ज़मीन पर रखने की बात करने वाले वारा ज़मीन से जुड़े नेता हैं, उनके निर्वाचन क्षेत्र में अधिकतर लोग खेती से जुड़े अँगरेज़ हैं और वहाँ भारतीय मूल के लोगों की आबादी न के बराबर है.

शैलेश वारा

शैलेश वारा के जीवन और उनकी उपलब्धियों ने देव आनंद को बहुत प्रभावित किया था

विदेशी मूल का व्यक्ति होकर वोटरों का विश्वास जीतना कोई आसान काम नहीं है, वारा कहते हैं, "मेरे निर्वाचन क्षेत्र में 98 प्रतिशत लोग मूलतः अँगरेज़ हैं. लोगों की दिलचस्पी सिर्फ़ इस बात में है कि मैं उनके मुद्दों को ठीक से उठा सकता हूँ या नहीं, मैं एक बडे ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधत्व करता हूँ, मेरे इलाक़े में जो किसान हैं वे ये देखना चाहते हैं कि कृषि से जुड़े मुद्दों मैं कितना प्रभावी हूँ, उन्हें मेरे बैकग्राउंड में कोई फर्क़ नहीं पड़ता है."

'हर हाल में' इंग्लैंड की क्रिकेट टीम को सपोर्ट करने वाले वारा कहते हैं कि उन्हें अपनी पहचान को लेकर कोई भ्रम नहीं हैं, "ब्रिटेन मेरा देश है, मैं सबसे पहले ब्रितानी हूँ. भारत मेरा मूल है. ज़ाहिर है, मेरे दिल में भारत के लिए विशेष स्थान है क्योंकि मेरी जड़ें वहाँ हैं. मैं भारत की संस्कृति और तौर-तरीक़ों को दूसरे लोगों के मुकाबले बहुत अच्छी तरह समझता हूँ, दोनों देशों के रिश्तों के मामले में मैं एक पुल का काम कर सकता हूँ."

1992 में 32 साल की उम्र में पहली बार भारत गए वारा कंज़रवेटिव पार्टी के संसदीय गुट--कंज़रवेटिव फ्रेंड्स ऑफ़ इंडिया--के चेयरमैन भी हैं और अब अक्सर भारत जाते रहते हैं, कुछ सप्ताह पहले की अपनी भारत यात्रा में मिली गर्मजोशी को वे बहुत प्यार से याद करते हैं.

कुशल वक्ता वारा कहते हैं, "मैं भारत सरकार के निमंत्रण पर कंज़रवेटिव पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहा था. मैं कई वरिष्ठ नेताओं से मिला. भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता चाहता है, मेरे विचार में उसे स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए, मेरी पार्टी भारत के दावे का समर्थन कर रही है."

भारत से रिश्ता

ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय समुदाय की गतिविधियों में अक्सर शरीक होने वाले वारा अपनी पार्टी के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद के दावेदार डेविड कैमरून को इस बार दीवाली के कार्यक्रम में ले गए, कैमरून जब भी भारतीय समुदाय से मुख़ातिब होते हैं तो उनका भाषण वारा ही तैयार करते हैं.

भारत मेरा मूल है. ज़ाहिर है, मेरे दिल में भारत के लिए विशेष स्थान है क्योंकि मेरी जड़ें वहाँ हैं. मैं भारत की संस्कृति और तौर-तरीक़ों को दूसरे लोगों के मुकाबले बहुत अच्छी तरह समझता हूँ, दोनों देशों के रिश्तों के मामले में मैं एक पुल का काम कर सकता हूँ

शैलेश वारा, ब्रितानी सांसद

रोटी-सब्ज़ी को अपना प्रिय भोजन बताने वाले वारा थोड़ी-थोड़ी हिंदी और धल्लड़े से गुजराती बोलते हैं. वे कहते हैं, "मैं अपने मां बाप से हमेशा गुजराती में बात करता हूँ, मैं मानता हूँ गुजराती या अपनी भाषा का अभ्यास करते रहने का यही सही तरीक़ा है."

देव आनंद और शिल्पा शेट्टी जैसी भारतीय फ़िल्मी हस्तियों से कई बार मिल चुके वारा ऐश्वर्य राय के फ़ैन हैं, "वे बेहतरीन अभिनेत्री हैं, मुझे अभी तक उनसे मिलने का मौक़ा नहीं मिला है. मैं ज़रूर उनसे मिलना चाहूँगा."

सोलह-सत्रह साल की उम्र में उनकी दिलचस्पी दो चीज़ों में हुई, राजनीति और मार्शल आर्ट्स. उन्हें अफ़सोस है कि राजनीति तो जारी है लेकिन मार्शल आर्ट्स की प्रैक्टिस करने का समय नहीं मिल पाता.

कोरियाई मार्शल आर्ट ताए क्वांदो के ब्लैक बेल्ट शैलेश वारा कहते हैं, "दुख होता कि अब मैं प्रैक्टिस नहीं कर पाता, इसके लिए बहुत समय की ज़रूरत होती है. मैं आज भी कोई एक्शन फ़िल्म देखता हूँ तो उसमें माशर्ल आर्ट के किक और पंचेज़ दिखाई देते हैं, अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ के फाइट सीन में."

वारा कहते हैं कि ताए क्वांदो का सबसे बड़ा फ़ायदा ये है कि वे काफ़ी फिट हैं और अगले साल गर्मियों में होने वाले चुनाव के लिए कमर कस रहे हैं.

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