बदख्शाँ में आम जनजीवन की झलक

अफ़ग़ानिस्तान के बदख्शाँ में आम जनजीवन की झलक

  • बदख्शाँ पहुँचने के लिए हिंदुकुश की पहाड़ियों के पार जाना होता है, ये मुश्किल पहाड़ियाँ सदियों से काबुल वादी की ढाल का काम करती रही हैं. (सभी तस्वीरें - पाँच साल बाद काबुल गए बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के साउथ एशिया एडिटर नाज़ेश अफ़रोज़ के कैमरे से)
  • बदख्शाँ मध्य एशिया, चीन और पाकिस्तान से लगा हुआ है इसलिए वह मादक पदार्थों की तस्करी का अड्डा भी है, मादक पदार्थों को जलाते अफ़ग़ान अधिकारी.
  • बदख़शाँ में अंदाज़न 20 हज़ार लोग मादक पदार्थों के आदी है, एक पुनर्वास केंद्र में उनकी लत छुड़ाने की कोशिश चल रही है.
  • अब्दुल रशीद का कहना है कि उन्हें नशे की लत बेरोज़गारी और ग़लत संगत की वजह से लग गई, अब उनका इलाज चल रहा है.
  • ख़ुद को 80 साल का बताने वाले ये व्यक्ति पिछले पचास वर्षों से अफ़ीम के आदी हैं, अब वे इस आदत से मुक्ति पाना चाहते हैं.
  • बर्बाद हुए सोवियत टैंक हर जगह नज़र आते हैं, अक्सर सैनिक इनका अलग अलग उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते हैं.
  • बदख्शाँ में पुलिस का नया चेहरा. इन महिला पुलिसकर्मियों को मादक पदार्थों की तस्करी रोकने का काम सौंपा जा रहा है.
  • फ़राहनाज़ दस्तरमाल एक ग़ैर सरकारी संगठन से जुड़ी हैं, उनका उद्देश्य अफ़ग़ानिस्तान में बेहतर प्रशासन के लिए दबाव बनाना है.
  • फ़राहनाज़ अपने देश के भविष्य को लेकर बहुत सजग हैं और वे कहती हैं कि तालिबान के साथ बातचीत में महिलाओं के अधिकारों के साथ समझौता नहीं किया जाना चाहिए.
  • बदख्शाँ के शहर फैज़ाबाद की हालत काबुल से बेहतर है, इस लड़के को अकेले आइसक्रीम ख़रीदने जाने में कोई दिक्कत नहीं हुई.
  • बदख्शाँ की घाटी हेलिकॉप्टर से बहुत सुंदर दिखती है, यहाँ बहुत खेती हो रही है, कुछ साल पहले तक यहाँ अफ़ीम की फसल लहलहाती रहती थी.

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