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इधर उधर कीः रेहान फ़ज़ल

क्या आप को मालूम है कि आख़िरी मुग़ल बादशाह बहादुर शाह ज़फ़र की 49 औलादें थीं...कि वह एक ज़बरदस्त तीरंदाज़ और घुड़सवार थे...कि उनकी गिरफ़्तारी के बाद उन्हें लालक़िले में एक कठघरे में रखा गया था और लोग उन्हें उसी तरह देखने आते थे जैसे जानवरों को देखने चिड़ियाघरों में जाते हैं.

इन सब बातों का ज़िक्र है महमूद फ़ारूक़ी की किताब Besiged: Voices from Delhi 1857 में. इधर उधर की में रेहान फ़ज़ल आपकी मुलाक़ात करा रहे हैं महमूद फ़ारूक़ी से...