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बहस राजस्थान विश्वविद्यालय में

जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय राज्य का सबसे बड़ा और पुराना विश्वविद्यालय है. कुल चालीस हज़ार से ज़्यादा छात्र यहां उच्च शिक्षा के लिए आते हैं और राज्य के छह ज़िलों के महाविद्यालय इससे जुड़े हुए हैं.

इस विश्वविद्यालय के साथ राजा चलैया, एल एस रामास्वामी, इक़बाल नारायण, वाई के अलग और गणितज्ञ पी एल भटनागर जैसे नामवर लोगों का नाम जुड़ा है.

बीबीसी संवाददाता नाराय़ण बारेठ, नितिन श्रीवास्तव और तकनीकी संचालक दिव्या शर्मा की टीम पिछले दिनों इसी विश्वविद्यालय के परिसर में थी जहां भारतीय उच्च शिक्षा पर छात्रों और शिक्षकों के साथ गरमागरम बहस हुई.

सवाल उठे सुविधाओं पर, शिक्षकों की काबिलियत पर, शिक्षा के दायरे पर.

एक शिक्षक का ही कहना था, “शिक्षा के निजीकरण से छात्र अब कस्टमर बन गया है और विश्वविद्यालय दुकान. शिक्षक किताबों से नाता तोड़ रहे हैं.”

बहस मे शामिल वरिष्ठ स्थानीय पत्रकार राजन महान, जो इसी विश्वविद्यालय के छात्र रह चुके हैं, कहते हैं कि पिछले 15 सालों में शिक्षकों के स्तर में भारी गिरावट आई है.

एक छात्रा ने इस विश्वविद्यालय की तुलना दिल्ली और जेएनयू जैसे विश्वविद्यालयों से करते हुए कहा, “यहां लगता है जैसे 21वीं सदी की मानसिकता पहुंच ही नहीं पाई है.”

लेकिन कई छात्र थे जो विषम परिस्थितियों में भी राजस्थान विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा ग्रहण कर अपनी लक्ष्यप्राप्ति की तरफ़ आशान्वित नज़र आए.