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कुमाऊँ विश्वविद्यालय में बीबीसी की बहस

कुमाऊँ विश्वविद्यालय की स्थापना 1973 में हुई थी और इसके दो परिसर हैं. एक परिसर नैनीताल में और दूसरा अल्मोड़ा में है. इसके अलावा 65 कॉलेज इससे संबद्ध हैं.

एक अनुमान के अनुसार लगभग डेढ़ लाख छात्र-छात्राएँ विश्वविद्यालय से जुड़े हैं. इस विश्वविद्यालय से कई कुशल प्रशासक, डॉक्टर, इंजीनियर और कलाकार निकले हैं.

बीबीसी संवाददाताओं मुकेश शर्मा और शालिनी जोशी तकनीकी संचालक स्वाति चौहान के साथ पहुँचे कुमाऊँ विश्वविद्यालय के नैनीताल स्थित ठाकुर देब सिंह बिष्ट परिसर में.

नैनी झील के इर्द-गिर्द पहाड़ियों पर बसे ख़ूबसूरत नैनीताल में विश्वविद्यालय के छात्रों से जब बात हुई तो शोध में आने वाली परेशानियों से निकलती हुई चर्चा छात्र-छात्राओं और अध्यापकों के क्लास में नहीं पहुँचने तक भी पहुँची.

छात्र-छात्राओं ने ख़ुद को भी इसके लिए ज़िम्मेदार बताया और शिक्षकों को भी. चर्चा में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफ़ेसर विजय पाल सिंह अरोड़ा, परिसर के निदेशक प्रोफ़ेसर नरेंद्र सिंह बिष्ट, डीन स्टूडेंट्स वेलफ़ेयर सत्यपाल सिंह मेहता और रंगकर्मी ज़हूर आलम ने भी हिस्सा लिया.

इस चर्चा ने एक रोचक मोड़ तब लिया जब छात्र-छात्राओं ने ही एक ड्रेस कोड लागू करने की वकालत की, हालाँकि उनका एक वर्ग इसकी मुख़ालफ़त भी कर रहा था.

कुछ शोध छात्राओं ने उन्हें मिलने वाली राशि में हो रही देर का मसला उठाया जिस पर कुलपति प्रोफ़ेसर अरोड़ा ने भरोसा दिलाया कि वह व्यक्तिगत तौर पर उसे देखेंगे.