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और कितना ख़र्च?

राष्ट्रमंडल खेलों के आयोजन का ख़र्च दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है और राजस्व जुटाने का दावा भी खोखला साबित हो रहा है. आयोजन समिति के लाख दावों के बाद भी कि लागत से ज़्यादा मुनाफ़ा होगा, खेलों से जुड़ा खर्च बढ़ता जा रहा है और आमदनी के ज़रिए निचुड़ते जा रहे हैं. सुनिए बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव की विशेष रिपोर्ट.