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'हमारा भविष्य गड्ढे में है'

पिछले चार महीने से ग्रेटर नौएडा के भट्टा परसौल के किसान शांतिपूर्ण तरीक़े से धरने पर बैठे थे. यमुना एक्सप्रेस वे परियोजना के कारण सरकार उनकी उपजाऊ डज़मीनों का अधिग्रहण कर रही है.

किसान कहते हैं कि उनको कौड़ियों के भाव से मुआवज़ा दिया जा रहा है जबकि सरकार छह गुने दाम पर उनकी ज़मीन को दूसरे बिल्डरों के हाथों बेच रही है. भट्टा गांव में शनिवार को पुलिस और किसानों के बीच हुई गोलीबारी में दो सिपाही और एक किसान की मृत्यु हो गई.

उसी गांव के बलवंत सिंह कहते हैं कि अगर किसानों के हाथ से ज़मीन निकल गई तो आने वाली पीढ़ियाँ अपराध करने पर बाध्य होंगी या फिर शहरों में जाकर लोगों के घरों में झाड़ू पोंछा करेंगी. बलवंत सिंह से बात की बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी ने.