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बिन हाथों के लिख दी क़ामयाबी की दास्तान

सिलाई मशीन पर तेज़ी से चलते पैर, बिन हाथों के सुँई में धागा डालने का हुनर और मुंह में ब्रश थामकर रंगों के साथ ऐसी कलाकारी की हाथों से बनी बेहतरीन कलाकृति भी फ़ीकी पड़ जाए.

इस हफ़्ते 'सिटीज़न रिपोर्ट' की कड़ी में एक ऐसी गुमनाम शख्सियत की कहानी जो पेशे से दर्जी हैं, हुनर से एक बेहतरीन चित्रकार और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी.

फर्क है तो सिर्फ इतना कि क़ामयाबी की इस कहानी को लिखने के लिए इनके पास हाथ नहीं.

पेश है बिनोद कुमार सिंह की ज़बानी उनकी अपनी कहानी.