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'अब अमीर ही बन सकते हैं नेता'

प्रधानमंत्री कार्यालय ने यूपीए सरकार के मंत्रियों की संपत्त का ब्यौरा दिया, जिसके बाद एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफ़ॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने मिलकर इसकी तुलना वर्ष 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग को दिए गए संपत्ति के ब्यौरे से की.

नतीजा ये समाने आया कि मंत्रियों की संपत्ति दो वर्षों में औसतन 3.3 करोड़ बढ़ गई है.

इस पर 'मेल टुडे' अख़बार के संपादक भारत भूषण ने कहा कि बढ़ती संपत्ति की इस जानकारी से जनता में ये अहसास बढ़ेगा कि ये नेता उनकी आर्थिक दुर्दशा नहीं समझते.

उनसे बातचीत की बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य ने और पूछा कि क्या अब राजनीति ग़रीब आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है?