प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

न रावण ज़ालिम था,न मैं :मनातु महूवार

झारखंड के पलामू का इलाक़ा बंधुआ मज़दूरी का गढ़ माना जाता था जहाँ बड़े-बड़े ज़मींदारों के ज़ुल्म की दास्तानें आम रहीं.

यह वह इलाका था जहाँ ज़मींदारों की निजी सेनाएं हुआ करतीं थीं जो लोगों को ज़बरदस्ती बंधुआ मज़दूर के रूप में काम कराती थीं

पलामू के ही मनातु के इलाके में एक ऐसे ही ज़मींदार के किस्से आम रहे हैं जिन पर कुछ साहित्यकारों नें भी रचनाएं लिखीं हैं.

इन्हें 'मनातु महूवार' यानी मनातु के मालिक और 'मनातु के आदमखोर' के नाम से जाना जाता है. इन मनातु का नाम महूवार जगदीश्वर जीत सिंह है. रायपुर से बीबीसी संवाददाता सलमान रावी ने महूवार जगदीश्वर जीत सिंह से बातचीत की.