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हौसले का नाम, मंगलाराम

मंगलाराम सूचना के सिपाही हैं. राजस्थान के बाड़मेर ज़िले की धोरीमन्ना ग्राम पंचायत के हैं. सूचना मांगने के बदले में इनपर भरी पंचायत में जानलेवा हमला हुआ और आज 10 महीने बाद भी मंगलाराम अपने पैरों से चल नहीं सकते. हड्डियां कई जगह से टूटी हुई हैं.

पर हौसला नहीं टूटा है. सूचनाएं अभी भी मांग रहे हैं. इसका असर भी दिख रहा है. अनियमितताएं घटी हैं. काम होने शुरु हुए हैं.

मंगलाराम की कहानी के बहाने हम राज्य में दलित राजनीति की भी टोह ले रहे हैं.

सुनिए, यह विशेष रिपोर्ट--