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बच्ची हमें पहचान ही नहीं पाई - सागरिका

नॉर्वे में एक भारतीय दंपति की ख़बरें पिछले कुछ समय से सुर्खियों में हैं. नॉर्वे के सामाजिक कल्याण अधिकारियों ने पिछले साल मई में उनके दो छोटे बच्चों को ये कहते हुए उनसे छीन लिया कि वे बच्चों की ठीक से देखभाल नहीं कर पा रहे. इन बच्चों को फ़ोस्टर पेरेंट्स, यानी सौतेले माँ-बाप के पास भेज दिया गया है. इस घटना को लेकर ख़ासा हंगामा हुआ और भारत सरकार को भी इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है जिसने नॉर्वे के विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है. नॉर्वे में काम कर रहे अनुरूप भट्टाचार्य और उनकी पत्नी सागरिका भट्टाचार्य को आज तीन महीने बाद अपने बच्चों को देखने दिया गया.

अपूर्व कृष्ण ने बच्चों की माँ सागरिका भट्टाचार्य से, उनकी बच्चों से मुलाक़ात के बाद बात की.