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'तेरी जात चोर है'

ग़ुलाम भारत में अंग्रेजों नें कई जनजातियाँ को क्रिमिनल ट्राइब्स यानी के आपराधिक जनजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया था. यह वह जनजातियाँ थीं जो सभव से लड़ाकू मानी जाती थीं. आजादी के बाद 1952 में इन जनजातियों को विमुक्त तो कर दिया गया मगर इन जनजातियों की जिंदगियां कुछ बेहतर नहीं हो पायीं. आज भी इनकी पहचान आपराधिक जनजाति के रूप में ही की जाती है. मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में एक ऐसी ही विमुक्त जनजाति है पारधी जो अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. 2007 में इनके घरों को एक प्रायोजित भीड़ नें जला दिया. पांच सालों के बाद इन्हें इन्साफ नहीं मिल पाया है. आज यहभीख मांगकर अपना गुज़ारा करते हैं. बीबीसी संवाददाता सलमान रावी की विशेष प्रस्तुति-