रंगों की दुनिया जानवरों की नजर से

 गुरुवार, 5 जुलाई, 2012 को 05:49 IST तक के समाचार
  • लंदन में एक विशेष प्रदर्शनी लगी है जिनमें विज्युल दुनिया को जानवरों और पक्षियों की नजर से समझाने की कोशिश की गई है. यूनिवर्सिटी ऑफ लिंकन के डॉक्टर टॉम पाइक कहते हैं कि मकसद ये समझना है कि जानवरों के रंगों के पीछे क्या रहस्य है.
  • मनुष्यों की तुलना में पक्षी कहीं ज्यादा तरह के रंगों को पहचान सकते हैं क्योंकि उनकी आँखों में चार तरह के कोन सेल होते हैं जिन्हें फोटोरिसेप्टर कहते हैं. जबकि मनुष्य की आँखों में तीन ही कोन सेल होते हैं. पक्षी यूवी लाइट या पराबैगनी किरणों को पहचान सकते हैं, जिस वजह से मोर के इस पंख में रंगों का भेद उनके लिए उभर कर आता है.
  • वहीं कुछ स्तनपायी जीवों ( मैमल) की आँखों में आमतौर पर दो ही कोन सेल होते हैं. रंगों की उनकी समझ कुछ वैसी ही होती है जैसे लाल-हरा रंग न पहचान पाने वाले मनुष्यों की होती है. कुत्तों में ऐसा ही होता है. ये तस्वीर एक कुत्ते की नजर से है जिसमें वो अपने मालिक को देख रहा है. डॉक्टर पाइक के मुताबिक कुत्तों की दृष्टि बहुत ज्यादा विकसित नहीं होती है.
  • इस तस्वीर में एक ही गिलहरी को दो नजरिए से दिखाया गया है. नीचे का हिस्सा मनुष्य की नजर से है और ऊपर का हिस्सा गिलहरी की नजर से. डॉक्टर पाइक के मुताबिक रंगों के हिसाब से स्तनपायी जीव थोड़े नीरस होते हैं. वो पृष्ठभूमि में रम जाने भर के लिए ही रंगों पर निर्भर रहते हैं न कि संचार के लिए.
  • ये प्रजाति उन बिरले जीवों में से है जो सर्कुलर पोलराइज़ड लाइट यानी वृताकार ध्रुवीकृत प्रकाश को देख और परावर्तित कर सकता है. लोग म्यूजियम में डीजिटल चश्मे के जरिए इसे देख सकते हैं
  • कीड़ों के रंगीले, चमकदार बदन के रंगों को उनके समजीवी मनुष्य से ज्यादा पहचान सकते हैं. वैज्ञानिक इनके असल रंगों को समझने के लिए स्पेक्ट्रोफोटोमीटर जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं.
  • लंदन में लगी प्रदर्शनी में लोग यूवी लाइट और कैमरे की मदद से रंगों को बदलकर भी देख सकते हैं.

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