15 अगस्त पर क्या कहते हैं ओलंपिक के हीरो

 बुधवार, 15 अगस्त, 2012 को 13:46 IST तक के समाचार
  • विजय कुमार (निशानेबाजी में रजत पदक): मुझे काफी खुशी हो रही है कि मैं अपने पहले ही ओलंपिक में देश के लिए कुछ कर पाया. किसी भी खिलाड़ी के लिए इससे बड़ी बात नहीं हो सकती कि जब उसके प्रदर्शन से देश का नाम रोशन हो. जब उसके प्रदर्शन से किसी दूसरे मुल्क में देश का झंडा ऊपर हो. मैं चाहता हूं कि देश का युवा जो काम करे पूरा मन लगाकर करे. और साथ ही भारत से भ्रष्टाचार का नामो-निशान मिट जाए.
  • गगन नारंग (निशानेबाजी में कांस्य पदक) : जब मैंने पदक जीता तो तिरंगा लहराते देख कर मेरा सीना चौड़ा हो गया. ज्यादा खुशी होती अगर हमारा तिरंगा पहले स्थान पर लहरा रहा होता. लेकिन खुशी है कि 15 अगस्त से पहले मैं देश के लिए जो कर सकता था, वो किया. ये मेडल सिर्फ मेरा नहीं पूरे देश का है क्योंकि हर एक भारतीय का योगदान है इसमें. मेरा सपना है कि एक दिन भारत ओलंपिक का आयोजन करे.
  • सुशील कुमार
    सुशील कुमार (कुश्ती में रजत पदक विजेता): जब मैं पोडियम पर खड़ा था, तिरंगा ऊपर जा रहा था और इतने लोग थे जो नारे लगा रहे थे. तब महसूस हुआ कि मैंने देश के लिए कुछ किया है. सबसे पहले मैं गगन नारंग को मुबारकबाद देना चाहूंगा क्योंकि उन्होंने पहला मेडल जीता जिसने हमारे दिलों में जोश भर दिया. मैं देश के युवाओं से कहना चाहूंगा कि आप अपने गुरुओं और बड़ों का सम्मान करें, कड़ी मेहनत करें. कामयाबी जरूर मिलेगी.
  • योगेश्वर दत्त (कुश्ती में कांस्य पदक विजेता): ये मेरा तीसरा ओलंपिक था. खुशी है कि 15 अगस्त से पहले जो सोचा था वो हो गया. मजा आ गया. सभी देशवासियों को शुभकामनाएं, उन्हीं की वजह से मैं कांस्य पदक जीत पाया. लंदन में लोगों का जबरदस्त सहयोग मिला. हम छह मेडल जीते. आगे और भी बेहतरीन प्रदर्शन कर दिखाएंगे.
  • साइना नेहवाल (बैडमिंटन में कांस्य पदक विजेता) : जब मैं नौ साल की थी तभी मेरी मां कहती थी कि तुम्हें बड़े होकर ओलंपियन बनना है, उस वक्त मैं मम्मी से कहती थी कि आप मेरे साथ मजाक कर रही हो, मैंने अभी खेलना शुरु किया है और इतने बड़े सपने मैंने तय नहीं किए हैं. लेकिन मैंने फिर इतनी कड़ी मेहनत की कि 11 साल की उम्र तक आते-आते मैंने भी सोचना शुरू कर दिया कि मैं भी ओलंपिक खेलूंगी. मुझे खुशी है कि मैं ओलंपिक मेडल जीत पाई और कई युवाओं को मेरी वजह से प्रेरणा मिली. इस 15 अगस्त पर मैं उम्मीद करती हूं कि आने वाले समय में भारत एक बड़ी खेल ताकत के रूप में उभरेगा.
  • ज़यदीप करमाकर (निशानेबाजी में महज चंद अंकों से कांस्य पदक से चूके, 55 प्रतियोगियों में चौथे स्थान पर रहे) : जैसे ही मुकाबला खत्म हुआ, सारे समर्थक आकर बोले, तुमने मैच तो नहीं जीता लेकिन सबका दिल जीत लिया. जब विजय कुमार ने मेडल जीता तो वो हम सबके लिए बेहतरीन क्षण था. जब एक खिलाड़ी ओलंपिक्स में तिरंगे की जैकेट पहनता है तो उससे बड़ा इनाम कोई हो ही नहीं सकता. 15 अगस्त पर हमारे खिलाड़ियों की वजह से देश में खेल को लेकर जो जागरुकता आई है वो बहुत अच्छी बात है. मैं चाहता हूं कि भारत में किसी खिलाड़ी को चैंपियन बनने के लिए शुरुआत से ही तैयार किया जाय और बाद में जब वो जीते तो उससे पर्याप्त इनाम देकर प्रोत्साहित भी किया जाय.
  • पी कश्यप (पुरुष एकल बैडमिंटन में बेहतरीन प्रदर्शन, लेकिन पदक से चूके): ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए गया था. अब संतोष तभी मिलेगा जब मेरे हाथ में मेडल होगा.. ओलंपिक का स्टेज बहुत बड़ा है. वहां मैं भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा था. मुझे यही भावना बहुत बड़ी लगती है. साइना की मेडल सेरेमनी मैंने देखी तो मुझे ऐसा लगा कि बस यही करना है. वो लोगों का चिल्लाना, वो तिरंगे का ऊपर जाना, किसी खिलाड़ी के लिए इससे बड़ा क्षण नहीं हो सकता.

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