मच्छरों की दुश्मन 'ट्रेन'

 शनिवार, 8 सितंबर, 2012 को 09:05 IST तक के समाचार

मच्छर मारती ट्रेन

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    मॉस्किटो टर्मिनेटर या मच्छरों को मारने वाली ये ट्रेन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चलाई जाती है.

    ये भारतीय रेलवे और दिल्ली नगर निगम की साझा परियोजना है.

    बरसात के मौसम में रेलवे लाइनों के किनारे और आसपास की बस्तियों में जमा पानी में मच्छर पैदा हो जाते हैं.

    इस ट्रेन पर लगा टैंकर रास्ते में दवा का छिड़काव करता चलता है.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    दिल्ली नगर निगम के इस टैंकर में पावर स्प्रे लगा होता है जो 50 से 60 मीटर तक दवा का छिड़काव कर सकता है.

    इस दवा को बैक्टीसाइड कहा जाता है. ये एक जैविक दवा होती है इसलिए महँगी होती है.

    इस दवा का इंसान के शरीर पर दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता है.

    एमसीडी के मुताबिक एक टैंकर पर करीब 50,000 रुपए का खर्च आता है.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    रेलवे अधिकारियों के मुताबिक वैसे तो इस परियोजना की शुरुआत वर्ष 2000 में की गई थी लेकिन नियमित रुप से इस ट्रेन ने काम करना पिछले तीन साल से शुरु किया है.

    ये ट्रेन अगस्त से अक्तूबर महीने में पंद्रह दिन के अंतराल पर तीन चरणों में चलती है.

    इन चरणों में यह रिंग रेलवे के अलावा दिल्ली से सटे गुड़गांव और गाजियाबाद भी जाती है.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    भारतीय रेलवे में डॉक्टर अमरीश गुप्ता का कहना है कि रेलवे लाइनों से लगी कई बस्तियां होती हैं जहां लोग कूड़ा फेंकते हैं और पानी निकलने की बेहतर व्यवस्था न होने के कारण एक ही जगह पर पानी इकट्ठा होता जाता है.

    ऐसे में यहां मच्छर पनपने लगते हैं और बरसात में इनकी तादाद और बढ़ जाती है.

    ये छिड़काव मच्छरों के लार्वा को मारता है.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    दिल्ली नगर निगम में डॉक्टर एनआर तुली का कहना है कि इस दवा के छिड़काव का असर 15 दिन तक रहता है.

    हालांकि ये दवा डेंगू को मारने में कारगर नहीं है लेकिन ये मलेरिया और संक्रामक रोगों की रोकथाम में सहायक होती है.

    इस दवा के छिड़काव से लार्वा का घनत्व कम हो जाता है.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    इस परियोजना को बहुत ही प्रभावी बताया जा रहा है.

    भारतीय रेलवे में चीफ इंस्पेक्टर मलेरिया, विनोद कुमार का कहना है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन और रेलवे लाइनों पर लगातार ट्रेन का आना-जाना रहता है ऐसे में ट्रेन को चलाने के लिए ट्रैक का ध्यान रखना होता है.

    ट्रेन की गति भी 15 से 20 किलोमीटर प्रति घंटा होती है ताकि दवा का छिड़काव बेहतर तरीके से किया जा सके.

  • टर्मिनेटर ट्रेन

    नगर निगम में उप स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर एनआर तुलसी का कहना है कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए ऐसी परियोजना हर राज्य में लागू होनी चाहिए.

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