एंडी मरे: शर्मीले लड़के का ग्रैंड स्लैम चैंपियन बनने का सफ़र

 मंगलवार, 11 सितंबर, 2012 को 10:51 IST तक के समाचार
एंडी मरे

अपनी गर्लफ़्रैंड के साथ जीत की ख़ुशी साझा करते एंडी मरे

पंद्रह साल की उम्र में घर-बार छोड़कर स्पेन के लिए रवाना होने वाले और बीस साल की उम्र में टेनिस के सबसे मंहगे कोच को नौकरी से निकालने वाले एंडी मरे ने ये कर दिखाया है. जी हां, एंडी मरे ने पहला ग्रैंड स्लैम ख़िताब जीत लिया है.

बहुत कम खेल हैं जो खिलाड़ियों को टेनिस जैसी मनोस्थिति से सामना करवाते हैं और ऐसे खिलाड़ी भी कम ही हैं जिन पर हर साल किसी मुल्क़ की उम्मीदों का बोझ रहता है.

एंडी मरे आसानी से नहीं मुस्कुरा पाते क्योंकि बीते सात सालों में उनके व्यक्तित्व, व्यवहार और खेल के तरीके पर कई प्रश्नचिन्ह लगाए गए थे.

11 साल की उम्र में एंडी मरे को कोचिंग देने वाले लियोन स्मिथ कहते हैं कि उन्होंने इतनी प्रतिभा वाला बालक पहले नहीं देखा था.

उसके बाद बने मरे के कोच कोलंबिया के पातो अल्वारेज़ कहते हैं, “मैं 16 साल तक स्पेन का राष्ट्रीय कोच था. जिन खिलाड़ियों को मैंने कोचिंग दी है उनमें एंडी मरे बेहतरीन थे.”

शर्मीला और मेहनती

 एंडी मरे

20 अगस्त 1999 को नॉटिंघम में अंडर14 प्रतियोगिता जीतने के बाद युवा एंडी मरे

बारह साल की उम्र में प्रतिष्ठित ओरेंज बॉल प्रतियोगिता जीतने के तीन साल बाद एंडी मरे ब्रिटिश अकादमी छोड़कर बार्सिलोना की सांचेज़-कसाल अकादमी में चले गए थे.

बार्सिलोना अकादमी की सह-संस्थापक इमीलियो सांचेज़ विकारियो कहती हैं कि शुरू में एंडी मरे एक बेहद शर्मीले खिलाड़ी थे जो अपने आप में ही खोए रहते थे.

एंडी मरे ने इस अकादमी में ख़ूब अभ्यास किया. उनकी प्रैक्टिस किसी सज़ा से कम नहीं है. वे घंटों टेनिस बॉल को हिट करते रहते हैं. उनके जीवन का मंत्र है – कड़ी मेहनत करो और फ़िट शरीर पाओ.

कड़ी मेहनत और दक्षता उन्हें टेनिस के शीर्ष तक ले गई. 18 साल की उम्र में वे 375वीं रैंकिंग पर थे लेकिन बीस साल के होते-होते वे दुनिया के शीर्ष दस खिलाड़ियों शामिल हो गए थे.

ज़बर्दस्त बैकहैंड और ज़ोरदार सर्विस के बाद आने वाले रिटर्न का बेहतरीन पूर्वानुमान एंडी मरे को बेहतरीन खिलाड़ी बनाता है.

लेकिन इसके बावजूद एंडी मरे के लिए कुछ दिक्कतें थीं. दरअसल तीन दिक्कतें थीं. मरे से पांच साल बड़े रोजर फ़ेडरर, एक साल बड़े रफ़ाएल नडाल और उन्हीं की उम्र के नोवाक जोकोविच.

ढीले और नकारात्मक?

अपनी मां के साथ एंडी मरे

14 सितंबर 2004 को यूएस ओपन में लड़कों का ख़िताब जीतने के बाद स्कॉटलैंड पहुंचे एंडी मरे अपनी मां के साथ

साल 2008 में रोजर फ़ेडरर ने कहा था, “एंडी मरे को काफ़ी मेहनत करनी है.” महान टेनिस खिलाड़ी रोजर फ़ेडरर के ये शब्द कई अन्य जानकारों ने भी दोहराए थे. एंडी मरे साल 2008 में अपने पहले ग्रैंड स्लैम में रोजर फ़ेडरर से ही हारे थे.

और साल 2011 के जोकोविच के ख़िलाफ़ ऑस्ट्रेलियन ओपन फ़ाइनल में हार के बाद लगने लगा कि एंडी मरे के लिए कहानी हर बार एक जैसी ही रहने वाली है. कई कोच आए और गए. इनमें ब्रैड गिल्बर्ट भी थे जिन्हें मरे ने 16 महीनों में ही बाहर कर दिया था.

विश्व में दूसरी रैंकिंग, कई मास्टर्स और एटीपी ख़िताब, फ़ेडरर, नडाल और जोकोविच पर कई जीतें....ये सब बेमानी थे क्योंकि हर बार वो ग्रैंड स्लैम में चूक जाते थे. कई लोगो के लिए किसी टेनिस खिलाड़ी की कामयाबी का एक ही पैमाना है – विंबलडन में जीत.

अगर ब्रितानी खिलाड़ी टिम हेनमैन को मध्यम वर्गीय और बहुत ही विनम्र माना जाता था तो एंडी मरे को नकारात्मक कहा जाता रहा है.

लोगों के इस नज़रिए की थोड़ी ज़िम्मेदारी एंडी मरे को भी लेनी होगा. टेनिस के कोर्ट पर चीखते-चिल्लाते एंडी मरे तस्वीर कई जानकारों के लिए आलोचना का सबब बन गई थी.

जो लोग टेनिस टूर्नामेंट का इंतज़ाम करते हैं – जैसे खिलाड़ियों के लिए ठहरने का प्रबंध करने वाले, कारों का इंतज़ाम करने वाले, मीडिया को इंटरव्यू दिलाने वाले- सभी कहते हैं कि एंडी मरे बहुत ही विनम्र व्यक्ति हैं. लेकिन कोर्ट पर आते ही ये सब बदल जाता था.

नई मंज़िलें

एंडी मरे और जोकोविच

एंडी मरे और जोकोविच दोनों 25 साल के हैं और ये प्रतिस्पर्धा आने वाले सालों में और तीव्र होने वाली है.

साथ ही एंडी मरे के खेल में एक तकनीकी ख़ामी भी थी. उनकी पहली सर्विस घातक तो थी लेकिन वे इसमें कई बार चूक जाते थे और दूसरी सर्विस पर हमले का शिकार हो जाते थे.

सीधे हाथ से विरोधी के कोर्ट में शॉट जिसे टेनिस में ‘डॉउन द लाइन फ़ोरहैंड’ कहते हैं, उसमें भी वो पूरी तरह से दक्ष नहीं थे. कोर्ट के बाहर हर साल बिंवल्डन के दौरान ‘ब्रिटिश बनाम स्कॉट’ की बहस छिड़ती रही है.

एक स्कॉट और ब्रिटिश होने के बारे में मरे कभी भी किसी द्वेष में नहीं रहे हैं. वे इंग्लैंड में रहते हैं, उनकी गर्लफ़्रैंड अंग्रेज़ है, उनका स्टाफ़ भी अंग्रेज़ है और उनके कुछ बेहतरीन दोस्त भी इंग्लैंड से ही हैं.

डेविस कप में ब्रिटेन के लिए स्कॉटलैंड में खेलते हुए एंडी मरे की आंखों से आंसू निकल आए थे.

लेकिन इस साल तो एंडी मरे ब्रितानी अवाम के चहेते ही बन गए. इस साल बिंवल्डन के फ़ाइनल में फ़ेडरर से हार के बाद वे काफ़ी भावुक हो गए लेकिन कुछ दिनों बाद ओलंपिक के जीतकर सारे देश के चहेते बन गए.

फ़ेडरर पर मिली वो जीत न्यूयॉर्क में होने वाले ग्रैंड स्लैम में एंडी मरे का पलड़ा भारी करने वाली साबित हुई और यूएस ओपन में नडाल की ग़ैर-मौजूदगी ने काम थोड़ा और आसान कर दिया.

यूएस ओपन में मिली जीत के बाद एंडी मरे अपने महत्त्वकांक्षाएं को दोबारा तय कर रहे होंगे. और इसमें उनका जुझारुपन ख़ूब काम आएगा.

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