पटाखों के बीच ज़िंदगी

 सोमवार, 17 सितंबर, 2012 को 13:22 IST तक के समाचार
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    विनायगया फायरवर्क्स सिवकासी के बाहरी इलाके किलाथिरुथंगल में स्थित है. एकड़ों तक फैली इस फैक्ट्री के बाहर लोहे का बड़ा सा गेट था. (सभी तस्वीरें: विनीत खरे)
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    फैक्ट्री के अंदर कई जगह आधे या फिर पूरे तैयार पटाखे सूखने के लिए रखे हुए थे.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    कुछ जगहों पर बारूद भी रखा हुआ था जिसे सूखने के लिए रखा गया था.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    फैक्ट्री में कई छोटे-छोटे कमरे थे जिनके अंदर महिलाएँ कई तरह के काम कर रही थीं. कुछ महिलाएँ पटाखों में पलीता लगा रही थीं.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    कुछ मजदूर तैयार पटाखों को एक जगह से दूसरी जगह ले जा रहे थे. इन मजदूरों को हर दिन के 150 रुपए से 200 रुपए दिए जाते हैं.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    एक मजदूर बारूद को कागजों के खोखों में भर कर पीट रहा था ताकि उसे कसकर भरा जा सके. ये खतरनाक काम है जिससे दुर्घटनाएँ भी हो सकती हैं.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    एक कमरे में कुछ महिलाएँ बारूद को छान रही थीं. ना उनके हाथों में दस्ताने थे, ना ही उनका चेहरा मास्क से ढका हुआ था. डॉक्टरों के मुताबिक इससे मजदूरों की सेहत को नुकसान पहुँचता है.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    एक दूसरे कमरे में महिलाएँ तैयार पटाखों पर रंगीन कागज चिपकाकर उसे पैक कर रही थीं.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    नारायणस्वामी (बाएँ) रसायनों के घोल को तैयार कर रहे थे जबकि नागराज धागों को चमकीले रसायनों में डुबोकर उसे टाँग रहे थे.
  • सिवकासी की फैक्ट्री
    इस फैक्ट्री के तकनीकी प्रमुख रवि कुमार ने बताया कि इस रसायन प्रयोगशाला में रसायनों की सफाई की जाँच होती है. यहाँ कई तरह के रसायन और साजो सामान रखा है.

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