पॉर्नोग्राफ़िक फ़िल्म की चोरी पड़ी महंगी

 शुक्रवार, 2 नवंबर, 2012 को 20:49 IST तक के समाचार
फ़ाइल

अमेरिका में पाइरेसी के ख़िलाफ़ अदालत पहुंच रहे हैं निर्माता.

अमूमन लोग पाइरेटेड मूवी कम खर्च के लिए देखते हैं. लेकिन यह आदत काफी महंगी साबित हो सकती है.

कम से कम अमरीका में तो यही हुआ है. अमरीका में एक शख्स पर 10 गे-पॉर्न मूवी को बिट टोरेंट वेबसाइट के जरिए शेयर करने का दोषी पाए जाने पर 15 लाख डॉलर का ज़ुर्माना लगाया गया है.

इलिनॉय की एक फ़ेडरल अदालत ने इन पॉर्न फिल्मों को बनाने वाली कंपनी निर्माता फ्लावा वर्क्स को प्रति फिल्म 1.5 लाख डॉलर की दर से भुगतान करने का आदेश दिया है. पाइरेसी के मामले में यह सबसे बड़ा हर्ज़ाना माना जा रहा है.

इस मामले में अभियुक्त क्वायन फ़िशर ने अपने बचाव करने की कोशिश नहीं की, इसलिए भी उन पर भारी ज़ुर्माना लगाया गया.

अदालत में फ्लावा वर्क्स ने सबूतों के जरिए यह बताया कि फ़िशर ही वह शख्स हैं, जो उनकी फ़िल्मों को पाइरेटेड करके बिट टोरेंट साइट पर अपलोड करते रहे हैं.

फ्लावा वर्क्स ने अदालत को बताया कि नकल से बचने के लिए उन लोगों ने अपनी फ़िल्मों पर एक ख़ास तरह के कोड का इस्तेमाल किया था, जिसे देखने के लिए उपभोक्ताओं को उसे खरीदना होता था.

डिजिटल जासूसी के जरिए कंपनी फ़िशर तक पहुंची. फ़िशर पहले इन फ़िल्मों को देखने के लिए फ्लावा वर्क्स के ग्राहक बने. उन्होंने फ़िल्मों की तय कीमत चुकाई और उसके बाद उसका नकल किया.

बिट टोरेंट पर फ़िल्म को अपलोड किए जाने के बाद उसे 3,449 बार डाउनलोड किया गया या देखा गया.

कई मामले ख़ारिज भी हुए हैं

फ्लावा ने अदालत में दावा किया कि फ़िशर ने कॉपीराइट ऐक्ट का उल्लंघन किया और उपभोक्ता के तौर पर जुड़ने के अनुबंधों का भी उल्लंघन किया.

अमेरिकी जज जॉन ली ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि फ्लावा द्वारा पेश किए गए सबूतों और बचाव पक्ष के नहीं होने के चलते उनके पास फ़िल्म कंपनी के पक्ष में फ़ैसला लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता.

अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि फ़िशर फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे या फ़िर ज़ुर्माना भरेंगे.

फ़िशर उन 15 लोगों में शामिल हैं, जिनमें एडल्ट फ़िल्म निर्माण कंपनी फ्लावा वर्क्स ने नकल करने का आरोप लगाया. इस मामले में सबूतों के अभाव में बाक़ी सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया.

मूवी स्टुडियो, रिकॉर्डिंग कंपनी सहित कई निर्माता अब नकल के ख़िलाफ़ नेट, आईपी एड्रेस जैसे सबूतों के सहारे अदालत में पहुंचने लगे हैं.

हालांकि इसी साल मई में अमरीकी फ़ेडरल अदालत ने इनमें से कई मामलों को ख़ारिज करते हुए कहा था कि आईपी एड्रेस किसी व्यक्ति को नकल का दोषी साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है.

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