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तेज़ाब से तार-तार हुई ज़िंदगी

सोनाली मुर्खजी केवल 17 साल की थी जब कुछ लोगों ने उसके चेहरे पर तेज़ाब फेंक दिया. सोनाली को वो रात आज भी याद है. सोनाली को घोर मानसिक दिक्कतों से गुज़रना पड़ा.लेकिन इच्छा मृत्यु माँगने वाली सोनाली ने अब आवाज़ बुलंद की है. अपने जले हुए चेहरे पर उसे शर्म महसूस नहीं होती. वो अपने हक़ के लिए लड़ रही है. उसने हिम्मत नहीं हारी है.