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चरमपंथ से ज़िन्दगी की राह पर

अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के ख़ैबर पख्तूनख्वाह में ऐसे नौजवानों की कमी नहीं जो तालिबान के दिखाए रास्ते पर चल पड़ते हैं.

हिंसक घटना से पहले गिरफ़्तार किए गए ऐसे नौजवानों को राह पर लाने की एक कोशिश पिछले साल से शुरू हुई है.

बीबीसी की शुमाएला जाफ़री ने टांक में चल रहे डिरैडिकलाइज़ेशन प्रोग्राम का जायज़ा लिया.