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पीयूष मिश्राःएक बगल में चाँद होगा, एक बगल में रोटियाँ

मैंने बहुत सी कविताएं पढ़ी हैं और बहुत सी पसंद भी हैं, लेकिन अगर मुझे किसी एक कविता का नाम लेना पड़े तो कहूंगा कि कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कविता ‘रश्मिरथी’ मुझे बहुत प्रिय है. ये एक लंबा-चौड़ा महाकाव्य है.

उसकी एक सतर मैंने ‘गुलाल’ फ़िल्म में इस्तेमाल की है क्योंकि वो मुझे बेहद पसंद थी.

रश्मिरथी’ कर्ण की ज़िंदगी पर लिखी गई थी. उसमें एक प्रसंग है कि कृष्ण भगवान को जब दुर्योधन हस्तिनापुर में बातचीत के लिए बुलाते हैं ज़मीन के बंटवारे के विषय में. वो कृष्ण को बांधने की कोशिश करते हैं. पंक्तियां कुछ इस तरह हैं –

हरि ने भीषण हुंकार किया, अपना स्वरूप-विस्तार किया, डगमग-डगमग दिग्गज डोले, भगवान् कुपित होकर बोले- ‘जंजीर बढ़ा कर साध मुझे, हाँ, हाँ दुर्योधन! बाँध मुझे।