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राष्ट्रनायक किसके?

इसी हफ़्ते गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केवड़िया में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 168 फुट ऊँची मूर्ति की आधारशिला रखी.

इसके बाद से राजनीतिक पार्टियों की ओर से चुनावी फ़ायदे के लिए राष्ट्र नायकों के इस्तेमाल पर गंभीर बहस छिड़ गई है.

पटेल ने महात्मा गाँधी की हत्या के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाया था पर आज बीजेपी उन्हें अपनाने की कोशिश कर रही है.

इसी तरह पहले महात्मा गाँधी, भीमराव अंबेडकर, भगत सिंह आदि को भी भुनाने की कोशिश की गई.

काँग्रेस पार्टी ने भी अंबेडकर का नाम तब लेना शुरू किया जब देश में दलितों का राजनीतिक असर बढ़ने लगा.

बाबरी मसजिद के ध्वंस के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने कबीर को अपनाने का ऐलान किया.

जिन्हें व्यापक जनता राष्ट्र नायक मानती है क्या उनके नाम पर राजनीतिक फायदा उठाया जाना उचित है?

बीबीसी इंडिया बोल में यही है चर्चा का विषय.