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गाँव की पिच से मिली शामी को रफ़्तार

छह जनवरी 2013 को दिल्ली के फ़िरोज़ शाह कोटला मैदान पर शामी ने अपना पहला वनडे मैच खेला. शामी ने पहले ही मैच में चार मेडेन ओवर फेंककर अपनी प्रतिभा की झलक दिखला दी थी. डेब्यू मैच में ऐसा करने वाले वो पहले भारतीय गेंदबाज़ भी बने.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा ज़िले के सहसपुर अलीनगर गाँव में किसान परिवार में पैदा हुए मोहम्मद शामी ने टीम इंडिया के तेज़ गेंदबाज़ के रूप में पहचान बनाई है.

मोहम्मद शामी के जीवन के अनछुए पहलुओं को जानने के लिए उनके पिता से खास बात की बीबीसी संवाददाता दिलनवाज पाशा ने.

शामी के पिता तौसीफ़ अहमद आज जब उन्हें टीवी स्क्रीन पर विकेट लेकर उछलते देखते हैं, तो उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं. शामी को प्यार से सिम्मी कहा जाता है.

सिम्मी बचपन से क्रिकेट के शौकीन रहे हैं. उनके पिता बताते हैं, "उसे जहाँ जगह मिलती, वहीं गेंदबाज़ी करने लगता. घर के आँगन में, छत पर, बाहर खाली पड़ी जगह में. 22 गज़ से लंबी हर जगह उसके लिए पिच होती."

बचपन में शामी टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलते थे. टेनिस की गेंद से भी उनकी रफ़्तार बल्लेबाज़ों में ख़ौफ़ पैदा कर देती.

सचिन की ऐतिहासिक विदाई सिरीज़ से शामी ने टेस्ट में आगाज़ किया. कोलकाता के ईडन गार्डन पर अपने पहले टेस्ट में नौ विकेट लेकर उन्होंने अपनी रफ़्तार का लोहा मनवाया.