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बलात्कार विरोधी कानून पर पुनर्विचार हो?

केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्लाह के इस बयान ने एक नई बहस छेड़ दी है कि अब तो उन्हें लड़कियों से बात करने में भी डर लगता है.

एक तरफ जहां आसाराम से लेकर तहलका पत्रिका के संपादक तरुण तेजपाल और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एके गांगुली तक पर यौन उत्पीड़न की कोशिशों के आरोपों ने महिला सुरक्षा को फिर चर्चा में ला लिया है, तो वहीं अब्दुल्लाह के बयान ने इस सवाल को जन्म दिया है कि क्या महिलाओं की सुरक्षा के लिए लाया गया कानून बेहद कड़ा है. क्या इस पर फिर से विचार होना चाहिए.

इसी विषय पर हुई इंडिया बोल में चर्चा. इससे बीबीसी के श्रोताओं के अलावा भाग लिया सीवी बद्रीनारायण और वकील प्राची मिश्रा ने.