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बीबीसी के ख़ज़ाने से: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय"

शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो हिंदी साहित्य में थोड़ी सी भी रुचि रखता हो और अज्ञेय के नाम और उनके साहित्य से परिचित ना हो. सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय" ने भले ही इस दुनिया से 1987 में विदा ले ली हो, लेकिन उनका काम, उनकी कृतियां नए रचनाकारों को आज भी प्रेरित करती हैं.

अज्ञेय को प्रतिभासम्पन्न कवि, कथा-साहित्य को एक महत्त्वपूर्ण मोड़ देने वाले कथाकार, सम्पादक और सफल अध्यापक के रूप में जाना जाता है.

भारत की आज़ादी की संघर्षगाथा में उनका नाम एक ऐसे क्रातिकारी के रूप में भी आता हैं , जो 1930 से 1936 तक अलग अलग जेल में रहे.

अज्ञेय प्रयोगवाद एवं नई कविता को साहित्य जगत में प्रतिष्ठित करने वाले कवि हैं.

1981 में अज्ञेय बीबीसी के लंदन दफ्तर आए जहाँ ओंकारनाथ श्रीवास्तव ने उनके सामने सवालों का पिटारा खोला..