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बीबीसी के खज़ाने से: दिलीप कुमार

1947 में जब भारत आज़ाद हुआ उसी साल भारतीय सिनेमा के पर्दे पर एक फिल्म जगूनू रिलीज़ हुई थी, जिसने पाकिस्तान के पेशावर से भारत आए एक युवा अभिनेता को स्टार का दर्जा दिला दिया. वो युवा अभिनेता और कोई नहीं बल्कि युसुफ खान यानी दिलीप कुमार हैं.

भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम दौर के हस्ताक्षर दिलीप कुमार अपने जीवंत अभिनय के लिए जाने जाते हैं.

अपने रुपहले सफर में दिलीप कुमार ने यूं तो हर तरह के किरदार निभाए पर दर्द भरे अभिनय के लिए उन्हे 'ट्रेजडी किंग' कहा गया. दिलीप कुमार को भारतीय फ़िल्मों में यादगार अभिनय करने के लिए फ़िल्मों का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार दिया गया.

दिलीप साहब के अभिनय की तूती ना सिर्फ भारत में बोलती है बल्कि सरहद के पार भी उनके दीवानों की तादाद करोडो में है. यहाँ तक कि उन्हें पाकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'निशान-ए-इम्तियाज़' से सम्मानित किया जा चुका है.

बीबीसी की वर्षांत प्रस्तुति में आज सुनिए दिलीप कुमार को उन्हीं के अंदाज़ में ..