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'जीने के लिए लड़ना ही पड़ेगा...'

1 मार्च 2014 अतिम अपडेट 14:15 IST पर

तीन मार्च 2002 के बाद उनकी आंखों से सुकून ग़ायब हो चुका है. डर पीछा नहीं छोड़ता और मायूसी जैसे उसका नसीब बन चुकी है.

अपनी नज़र के सामने परिवार के 14 लोगों की हत्या होते देखना, जिसमें खुद की बच्ची भी शामिल हो, सामूहिक बलात्कार का शिकार बनकर अधमरी हालात में कई घंटों तक पड़े रहना और फिर होश आने पर बड़ी मुश्किल से पास की पहाड़ी पर छिपकर अपनी जान बचाना.

जब यह सब हुआ उस समय बिलकिस बानो की उम्र करीब बीस साल होगी. गुजरात में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों को आज बारह साल बीत चुके हैं, लेकिन बिलकिस बानो का परिवार उस हादसे का परिणाम आज भी भुगत रहा है. बिलकिस अब तीन बेटियों और एक बेटे की मां हैं.

सुनिए बिल्क़िस बानो की कहानी. उनसे बात कर रही हैं चिरंतना भट्ट.