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हाल ही में एक हिंदी टीवी चैनल ने चुनाव-पूर्व सर्वेक्षण करवाने वाली कंपनियों पर छिपे हुए कैमरों की मदद से किए गए स्टिंग ऑपरेशन किया जिसमें कई आरोप सामने आए हैं और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर ही सवाल खड़े हो गए हैं.

जिन कंपनियों पर स्टिंग किया गया, उन्होंने आरोपों से इनकार किया है. कुछ समय पहले चुनाव आयोग ने सरकार से चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों पर चिंता जताते हुए उस पर रोक लगाने की बात कही थी. भारतीय जनता पार्टी ने ऐसे प्रस्ताव का यह कहकर विरोध किया था कि इससे विचारों की स्वतंत्रता पर असर पड़ेगा.

इन कंपनियों पर अब कार्रवाई की मांग की जा रही है. वर्ष 2004 में केंद्र की एनडीए सरकार ने जब चुनाव करवाने की सोची थी तब कई सर्वेक्षणों ने कहा था कि एनडीए दोबारा सत्ता में लौटेगी लेकिन सत्ता कांग्रेस के हाथ आई. सवाल ये कि इन चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों का आम चुनाव पर क्या सचमुच कोई असर पड़ता है?

क्या आप पर चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों का असर पड़ता है?

कार्यक्रम में शामिल हैं चुनाव विश्लेषक और सीएसडीएस के संजय कुमार, सर्वेक्षण कंपनी क्यूआरएस के अरुण बेहुरिया और पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी.