प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

अकेली औरतों की समस्याएं?

  • 9 मार्च 2014

पिछले एक साल से भारत में महिलाओं पर हो रही हिंसा चर्चा का विषय रहीं. लेकिन इससे इतर हर रोज़ की जिंदगी में उन महिलाओं का सफ़र कैसा होता है जो या तो अविवाहित है, तलाक़शुदा या फिर विधवा. वे एक तरह से महिलाओं पर हो रही आम चर्चा की परिधि से थोड़ी अलग-थलग खड़ी हैं.

शहरों और गांवों की कहानियों की ज़मीन ऐसी औरतों के लिए अलग हो सकती हैं लेकिन अनुभव भी क्या अलग होते हैं?

2001 जनगणना के मुताबिक देश में ऐसी औरतों की संख्या लगभग चालीस लाख है पर इस बढ़ती हुई तादाद के सफर में क्या समय के साथ कुछ तब्दिलियां भी आ रही हैं?

विश्व महिला दिवस के दिन चर्चा इस बार इंडिया बोल के मंच पर इन्हीं औरतों के जीवन पर उठ रहे सवाल और उनके जवाब ढूंढने की जद्दोजहद पर हुई.