मायावती
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क्या इन चुनावों में पकेगी मायावती की खिचड़ी?

पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव मायावती को 'लोकतंत्र का चमत्कार' कहते थे और अर्थशास्त्री स्वामीनाथन अय्यर सर्वोच्च प्रशासनिक पद को लेकर कहते हैं कि अगर ऐसा हुआ तो बहनजी 'एक बेहतरीन प्रधानमंत्री' साबित होंगी.

मायावती के जीवनीकार अजय बोस एक क़िस्सा बयान करते हैं. मायावती भारतीय प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती थीं, आईएएस बनना चाहती थीं. उसी दौरान कांशीराम उनके घर आए और कहा....छोड़ो ये सब. मैं तुम्हें इतना बड़ा नेता बना दूंगा कि आईएएस पंक्तिबद्ध होकर तुम्हारे सामने खड़े होंगे.

इस घटना के कुछ ही समय बाद मायावती संसद पहुंच गईं. सन् 1989 में.

तीन बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रहीं मायावती का संसद में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 21 सीटों का रहा है. ये पिछले चुनाव की बात है, जिसमें उन्हें 20 सीटें, 80 लोकसभा सीट वाले राज्य उत्तर प्रदेश से मिली थीं और एक मध्य प्रदेश से.

दिल्ली में किसी बड़ी भूमिका के लिए उन्हें ये प्रदर्शन बेहतर करना होगा. मायावती इस बार अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ रही हैं और उन्होंने उम्मीद का दामन पकड़ रखा है.

मायावती ने भले ही साल 2009 में सपा से मात खाई हो पर इन चुनावों में उनकी तैयारी ज़ोरों पर है. क्या उनकी उम्मीद की खिचड़ी पक पाएगी? मधुकर उपाध्याय का विश्लेषण.