क़तार के आख़िरी...कालाहांडी से

कालाहांडी में बीते दो सौ सालों से भुखमरी हर साल दौरा कर रही है. और जब-जब वह आती है, अपने साथ कई लोगों को ले जाती है. भूख की तरह हर पांच साल बाद यहां नेता आते हैं. वादे करते हैं और चले जाते हैं. सवाल यह है कि आख़िर वादों के बावजूद कालाहांडी की मुश्किलों का अंत क्यों नहीं होता. इसलिए कि वे सरकारी फ़ाइलों में क़तार के आख़िरी हैं? सुनिए, कालाहांडी में मौजूद भुखमरी के एक गांव के बाशिंदों की दास्तां.

(इस ऑडियो स्लाइड शो को केवल डेस्कटॉप पर ही देखा जा सकता है.)