क़तार के आख़िरी: बस्तर से बेदखल, आंध्र में 'घुसपैठिए'

ये क़तार के आख़िरी कुछ उन लोगों की दास्तान है, जिन्हें न तो सरकारी काग़ज़ों में जगह मिली है और न सरकार की सहानुभूति. उनके पास ऐसा कोई सुबूत नहीं कि वो साबित कर सकें कि वो इसी मुल्क के बाशिंदे हैं. चूंकि वो किसी पार्टी का वोट भी नहीं हैं, तो उनकी मांग, उन्हें सहूलियतें जैसी चीज़ें भी बेमानी हैं. वो सरकार और सुरक्षा बलों के बीच पिस रहे क़तार के आख़िरी लोग हैं. सुनें क्या कहते हैं ये लोग.

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