शरली एब्डो
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धर्म आलोचना और व्यंग्य से परे है?

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धर्मों, नेताओं और मान्यताओं का खुला मज़ाक उड़ाने वाली व्यंग्य पत्रिका शार्ली हेब्डो के दफ़्तर पर हमला हुआ.

चरमपंथियों ने चार कार्टूनिस्टों सहित 12 लोगों की हत्या कर दी. धार्मिक मान्यताओं पर हँसना इतना जोख़िम भरा क्यों?

आख़िर धर्म इतना संवेदनशील क्यों बन जाता है? क्या धार्मिक मान्यताएँ हास्य-व्यंग्य से परे रखी जानी चाहिए?

इंडिया बोल में यही था बहस का विषय.

कार्यक्रम में हिस्सा लिया प्रोफ़ेसर प्रकाश उपाध्याय, पत्रिका मिल्ली ग़जेट के संपादक डॉक्टर ज़फरुल इस्लाम खान और कार्टूनिस्ट राजेंद्र धोड़पकर ने.

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