मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम
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मुफ़्ती हूं, चरमपंथी नहीं: मुफ़्ती क़य्यूम

गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर हुए चरमपंथी हमले के आरोप में 11 सालों तक जेल में रहने के बाद मई 2014 में सुप्रीम कोर्ट से बाइज़्ज़्त बरी होने वाले मुफ़्ती अब्दुल क़य्यूम का कहना है कि इन 11 सालों में एक मौक़ा ऐसा भी आया जब उनकी पत्नी ने आत्महत्या करने की कोशिश की थी.

मुफ़्ती क़य्यूम के अनुसार इन सब के बावजूद भारत की न्यायपालिका पर उनका यक़ीन कभी कम नहीं हुआ और उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्हें अदालत से रिहाई मिल जाएगी.

शुक्रवार को दिल्ली में मुफ़्ती क़य्यूम की लिखी किताब '11 साल सलाख़ों के पीछे' के विमोचन के समय बीबीसी संवाददाता इक़बाल अहमद ने उनसे कई विषयों पर बात की.