प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

चीन की सांस्कृतिक क्रांति के 50 साल

16 मई 1966 को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने एक दिशानिर्देश जारी किया.

राजनीतिक अभियान के तौर पर एक दशक लंबी सांस्कृतिक क्रांति की शुरुआत हुई.

इसके तहत सरकार, शिक्षा और मीडिया में पूँजीवादी प्रभावों और बुर्जुआ सोच के ख़ात्मे की माँग की गई.

क्रांति के केंद्र में एक अहम शख़्सियत के तौर पर उभरे माओ.

लिटिल रेड बुक में लिखी गई माओ की कही बातें पढ़ना सबके लिए ज़रूरी हो गया.

देश भर में रेड गार्ड्स नाम से एक युवा संगठन उभरा, जिसका काम था माओ की शिक्षा फैलाना.

रेड गार्ड्स ने देश भर में घूमकर सांस्कृतिक विरासत को नष्ट किया. उन्होंने शिक्षकों और बुद्धिजीवियों से पूछताछ की और उन्हें पीटा भी.

1 करोड़ 60 लाख युवाओं को गाँवों में भेजा गया जिससे वे वहाँ मज़दूरी कर सकें और फिर से शिक्षित हों.

दसियों हज़ार अधिकारियों पर देशद्रोही होने का आरोप लगा. राष्ट्रपति लिउ शाओची को पार्टी से निकाल दिया गया और अकेलेपन में उनकी मौत हुई.

माओ के उत्तराधिकारी के तौर पर घोषित मार्शल लिन ब्याओ देश छोड़कर भागे मगर एक विमान दुर्घटना में उनकी मौत हो गई.

माओ की पत्नी ज्यांग चिंग और उनके नज़दीक़ी लोगों ने एक गुट बनाया जिसे लोगों ने गैंग ऑफ़ फ़ोर के नाम से जाना.

उन्होंने पार्टी में ही मौजूद उदारवादी लोगों के विरुद्ध अपना वामपंथी एजेंडा आगे बढ़ाया.

सितंबर 1976 में माओत्से तुंग की मौत हो गई.

इसके बाद गैंग ऑफ़ फ़ोर गिरफ़्तार हो गए तथा देश पर क़ब्ज़े की उनकी योजना रोक दी गई. इस तरह सांस्कृतिक क्रांति का अंत हुआ.