परमाणु क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा

बुश और मनमोहन
Image caption मनमोहन सिंह का व्हाइट हाउस में गर्मजोशी से स्वागत किया गया

अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया है.

वाशिंगटन में भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच मुलाक़ात के बाद जारी किए गए के साझा बयान में कहा गया है कि बुश प्रशासन अमरीकी कांग्रेस के साथ मिलकर इस संबंध में अपने देश के क़ानूनों और नीतियों को व्यवस्थित करने का प्रयास करेगा ताकि सहयोग की दिशा में काम हो सके.

अमरीका के इस फ़ैसले को उसकी नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण करने के बाद अमरीका ने भारत की निंदा की थी और उसे परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देना रोक दिया था.

साझा बयान में कहा गया है,"राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात में परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक के लिए भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि एक ज़िम्मेदार देश होने के नाते भारत को भी वही सुविधाएँ मिलनी चाहिए जो अन्य देशों को मिल रही हैं".

दोनों देशों के बीच यह सहमति भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की बातचीत के दौरान बनी.

अन्य क्षेत्र

दोनों देश अंतरिक्ष और उच्च प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाएँगे.

बातचीत के बाद सोमवार को बुश ने एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, "दोनों देशों के बीच इतने मज़बूत रिश्ते इससे पहले कभी नहीं रहे थे."

भारतीय प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में राष्ट्रपति बुश की प्रतिबद्धता की सराहना की.

इससे पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का व्हाइट हाउस में औपचारिक स्वागत करते हुए बुश ने अमरीका-भारत आर्थिक और कूटनीतिक रिश्तों को और मज़बूत बनाने की ज़रूरत बताई है.

सुरक्षित विश्व

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, "हम दो बड़े लोकतंत्र के नेताओं के रूप में मिल रहे हैं. हम बेहतर और सुरक्षित विश्व के लिए साथ काम करने को कटिबद्ध हैं."

अमरीकी राष्ट्रपति ने कहा, "हमारे राष्ट्रों के बीच इतना मज़बूत रिश्ता कभी नहीं था. आने वाले दिनों और वर्षों में यह और मज़बूत बनेगा."

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी यात्रा से दोनों देशों के बीच सामरिक साझेदारी बढ़ाने का मौक़ा मिलेगा.

उन्होंने कहा, "मुझे विश्वास है कि हम दोनों की बातचीत से दोनों देशों के बीच सहयोग का नया एजेंडा उभर कर सामने आएगा."

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