परमाणु ऊर्जा पर भारत उत्साहित

बुश और मनमोहन सिंह
Image caption मनमोहन और बुश की बातचीत में परमाणु ऊर्जा पर सहयोग के बारे में सहमति बन सकी

भारत सरकार ने दावा किया है कि 30 सालों से उसके परमाणु विकास में जो अड़चने थीं वो अब अमरीका के सहयोग से दूर हो जाएँगी.

अमरीका और भारत के एक साझा बयान में अमरीकी राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि भारत अति आधुनिक परमाणु तकनीक वाला एक ज़िम्मेदार देश है और उसे वो हर सुविधा और फ़ायदा मिलना चाहिए जो ऐसे देशों के पास है.

राष्ट्रपति बुश के इस बयान को विश्लेषक और भारतीय अधिकारी अमरीकी विदेश नीति में एक क्रांतिकारी बदलाव के रूप में देख रहे हैं.

प्रधानमंत्री के प्रवक्ता संजय बारू ने बुश के बयान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा,"परमाणु तकनीक में विकास के लिए जो भी प्रतिबंध भारत पर लगे थे वो हटा लिए गए हैं.’"

वैसे साझा बयान में इतने स्पष्ट शब्दों में ये बात नहीं कही गई है लेकिन भारत सरकार का मानना है कि एक नई शुरूआत हो चुकी है.

लंबा इंतज़ार

सोमवार की सुबह भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति की मुलाक़ात के ठीक बाद ही इस साझा बयान का सबको इंतज़ार था लेकिन उसे आने में लगभग पाँच घंटे लगे.

भारतीय विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी जयशंकर ने चुटकी लेते हुए कहा,"बस इतना समझ लीजिए इस दस्तावेज़ का हर शब्द एक लीटर ख़ून के बराबर है हमारे लिए. बहुत मेहनत के बाद हम इसे हासिल कर पाए हैं."

इस साझा बयान में राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि भारत को परमाणु उर्जा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग मिले इसके लिए वो अमरीकी नीतियों और क़ानूनों में बदलाव के लिए संसद के सामने तो जाएंगे ही साथ ही वो अपने सहयोगी देशों से भी अनुरोध करेंगे कि वो भारत को परमाणु उर्जा के क्षेत्र में हर संभव सहयोग दें.

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि न केवल भारत की वर्तमान ज़रूरतों को ध्यान में रखा गया है बल्कि भविष्य की साझेदारी भी इसमें शामिल है.

अधिकारियों का इशारा साझा बयान में तारापुर परमाणु भट्टी के लिए इंधन उपलब्ध करवाने और इंटरनेशनल थर्मो न्यूक्लियर एनर्जी रिसर्च प्रोजेक्ट में भारत को भागीदारी देने संबंधित बयान की ओर था.

उम्मीद से अधिक

भारतीय विदेश सचिव श्यामशरण ने कहा है कि इस यात्रा की उपलब्धि "उम्मीद से कहीं ज़्यादा है.’"

उनका कहना था,"इस साझा बयान से अमरीका ने एक मायने में भारत को एक उर्जा के क्षेत्र में एक परमाणु शक्ति का दर्जा दिया है."

परमाणु क्षेत्र में सी राजामोहन जैसे विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे से भारत ने जो हासिल किया है उसके बाद भारतीय परमाणु नीति पीछे मुड़ कर नहीं देखेगी.

और जहाँ तक अमरीकी कांग्रेस के सामने अमरीकी नीति में बदलाव के पास होने की बात है तो कहा जा रहा है कि यदि ये पास हो सकता है तो बुश प्रशासन में ही क्योंकि संसद के दोनों सदनों में उनका बहुमत है.

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