ओबामा के भाषण पर मिश्रित प्रतिक्रिया

बराक ओबामा
Image caption ओबामा का कहना है कि अमरीका इस्लामी जगत का दुश्मन नहीं है

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने मिस्र की राजधानी कहिरा में गुरुवार को दिए अपने भाषण में अमरीका और मुस्लिम देशों के बीच संदेह और मतभेद को दूर करने पर ज़ोर दिया.

उनके भाषण पर दुनिया के कई देशों और संगठनों ने प्रतिक्रिया दी है.

ख़ुद अमरीका में ओबामा की आलोचना हुई है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक उनके विरोधियों का कहना है कि ओबामा के भाषण से ऐसा लगा जैसे वो पूर्व राष्ट्रपति बुश की नीतियों के लिए माफ़ी माँग रहे हैं.

ओबामा समर्थकों में से कुछ ने ये मुद्दा उठाया कि ओबामा ने ये भाषण उस देश में दिया जहां की सत्ता दमनकारी है.

इसराइल सरकार

इसराइल ने कहा है कि वह ओबामा की इस राय से सहमत है कि मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष ख़त्म होना चाहिए लेकिन उसकी अपनी सुरक्षा उसके लिए सबसे ज़्यादा महत्व रखती है.

इसराइल की सरकार ने उम्मीद जताई है कि राष्ट्रपति ओबामा का भाषण मुस्लिम देशों और इसराइल के बीच सुलह-सफाई के एक नए युग की ओर ले जाएगा.

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अमरीकी राष्ट्रपति का संबोधन एक नए युग की शुरुआत का संकेत देता है.

इसराइल का कहना है, "इससे पूरा विवाद ख़त्म होगा और पूरा अरब जगत इसराइल को एक यहूदी देश के रूप में मान्यता देगा जो मध्य-पूर्व में शांति और सुरक्षा के साथ रहेगा. इसराइल शांति के लिए प्रतिबद्ध है और शांति के विस्तार के लिए काम करेगा."

अरब लीग

अरब लीग के अध्यक्ष अम्र मूसा ने कहा, "मुझे लगता है कि भाषण संतुलित था और इस्लामी देशों के साथ दोस्ती की एक नई दृष्टि देता है. उनके भाषण से पता चलता है कि अमरीका संतुलन की भावना के साथ इस क्षेत्र के मुद्दों से निपटना चाहता है. इसमें फ़लस्तीन का सवाल, इसराइली बस्तियों को हटाने और फ़लस्तीनियों के अधिकार की बात की गई है. इसका सम्मान किया जाना चाहिए."

फ़लस्तीनी प्रशासन

पश्चिमी तट में फ़लस्तीनी अधिकारियों ने कहा कि ओबामा का भाषण अगल फ़लस्तीन राष्ट्र के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण क़दम है.

फ़लस्तीनी नेता महमूद अब्बास के प्रवक्ता ने कहा, "ओबामा के भाषण का फ़लस्तीन मुद्दे से संबंधित हिस्सा नई शुरूआत है. यह दिखाता है कि फ़लस्तीन मुद्दे के लिए एक नई और अलग अमरीकी नीति है."

अयमन ताहा, ग़ाज़ा से हमास के प्रवक्ता

चरमपंथी संगठन हमास ने अमरीकी रवैये में बदलाव का स्वागत किया है. हमास ने ओबामा की इस बात के लिए आलोचना की है कि उन्होंने हिंसा के लिए इसराइल को नहीं बल्कि सिर्फ़ फ़लस्तीन को ज़िम्मेदार ठहराया.

हमास के प्रवक्ता अयमन ताहा का कहना था, "चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई की नीति को आगे बढ़ाने और फ़लस्तीनी ज़मीन पर लोगों के लिए दो देशों की दिशा में काम करने के बारे में ओबामा का भाषण पूर्ववर्ती राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की नीति से अलग नहीं है."

इराक़ सरकार के प्रवक्ता

भाषण ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण था. इससे नई अमरीकी सरकार के सकारात्मक पक्ष का पता चलता है और यह एक नई शुरुआत है. भाषण में क़ुरान की आयतों के प्रयोग से पता चलता है कि अमरीकी रुख़ में सकारात्मक बदलाव आया है लेकिन यहाँ कार्रवाई की ज़रूरत है.

इराक़ सरकार अमरीकी राष्ट्रपति के इराक़ के लिए वचनबद्धताओं के प्रति दिखाई गई साफ़गोई से सहज महसूस करती है, ख़ासकर इराक़ से सेना हटाने को लेकर उनका बयान स्वागत योग्य है.

मैं समझता हूँ कि इसमें फ़लस्तीन राज्य और उनके जीने के अधिकार को स्पष्ट समर्थन दिया गया है लेकिन अरब जगत को ग़ज़ा पट्टी और पश्चिमी तट पर इसराइल के अतिक्रमण को रोकने के लिए दबाव डाले जाने का इंतज़ार है.

हसन फ़ज़लुल्लाह, हिज़्बुल्ला के सदस्य

इस्लामी दुनिया को नैतिक या राजनीतिक उपदेश की ज़रूरत नहीं है.

उसे अमरीकी नीति में आमूल-चूल बदलाव की ज़रूरत है, ख़ासतौर पर फ़लस्तीन और लेबनान में इसराइली हमले रोकने, इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका सेना की वापसी और इस्लामी देशों के मामलों में अमरीकी दख़लंदाज़ी बंद करने के संबंध में. हम फ़लस्तीन के कारण अमरीकी नीति में कोई परिवर्तन नहीं देख रहे हैं.

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