सबको साथ लेकर चलेंगे: बुश

जॉर्ज बुश
Image caption बुश ने केरी के समर्थकों की ओर भी हाथ बढ़ाया

अमरीका के राष्ट्रपति पद के लिए दोबारा चुने गए रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार जॉर्ज बुश ने उन लोगों को भी साथ लेकर चलने की बात कही है जिन्होंने उनके प्रतिद्वंद्वी जॉन केरी को वोट दिया.

जीत के बाद अपने भाषण में बुश ने कहा है कि नए कार्यकाल के रूप में उन्हें और ज़्यादा लोगों तक पहुँचने का एक नया मौक़ा मिला है.

उधर उपराष्ट्रपति डिक चैनी ने कहा कि बुश को अपना परंपरागत एजेंडा लागू करने का जनादेश मिला है क्योंकि उन्होंने देश के इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति से ज़्यादा मत हासिल किए हैं.

इस बीच ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि बुश अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकते हैं.

विजयी होने के बाद अपने भाषण में राष्ट्रपति बुश ने कहा के अमरीकी नागरिकों ने उनपर जो भरोसा किया है उसने उन्हें और विनीत बना दिया है.

इससे पहले डेमोक्रैटिक पार्टी उम्मीदवार जॉन कैरी ने अपनी हार स्वीकार कर ली.

बोस्टन में केरी ने कहा कि उन्होंने मतभेद दूर करने के बारे में बुश से बातचीत की है.

लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे उन आदर्शों के लिए समर्पित रहें जिनके लिए चुनावी अभियान चलाया गया.

उधर बुश ने जॉन केरी के समर्थकों की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उनके समर्थन की ज़रूरत है और विश्वास जीतने की कोशिश करेंगे.

उन्होंने जॉन कैरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उन्होंने दमदार चुनाव प्रचार किया.

राष्ट्रपति बुश का कहना था, "मुझे गर्व है कि मैं इतने अदभुत देश का नेतृत्व कर रहा हूँ और मुझे इसे आगे ले जाने में गर्व महसूस होता है."

उन्होंने कहा, "हमारा एक ही देश है, एक संविधान है और एक ही भविष्य है जिससे हम बंधे हुए हैं. जब हम मिलकर, एक होकर काम करेंगे तो हम अमरीका को महान देश बनाकर किसी भी हद तक ले जा सकते हैं."

कौन अंदर कौन बाहर?

इस बीच ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि राष्ट्रपति जॉर्ज बुश अपने मंत्रिमंडल में कुछ फेरबदल कर सकते हैं.

संवाददाताओं का कहना है कि रक्षा मंत्री डोनाल्ड रम्सफ़ेल्ड की और चार साल के लिए इस पद पर बने रहने की कम संभावना है.

समझा जा रहा है कि विदेश मंत्री कॉलिन पॉवेल ने भी पद छोड़ने की मंशा ज़ाहिर की है हालाँकि बीबीसी के वाशिंगटन संवाददाता का कहना है कि सब इस राय से समहत नहीं है की पॉवेल सिर्फ़ यही चाहते हैं.

ऐसी भी ख़बरें हैं कि राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कोंडोलीज़ा राइस को कोई और ज़िम्मेदारी दी जा सकती है.

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