'ग़ज़ा के लोगों की निराश ज़िंदगी'

ग़ज़ा में एक बच्ची
Image caption ग़ज़ा में बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं

अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति ने ग़ज़ा में रह रहे लगभग पाँच लाख फ़लस्तीनियों को 'निराशा में फँसे' हुए लोग बताया है.

मंगलवार को जारी हो रही रेड क्रॉस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी सबसे बड़ी वजह इसराइली घेराबंदी है. ये रिपोर्ट ग़ज़ा में इसराइली सैनिक कार्रवाई के छह महीने बाद आई है. उस कार्रवाई में लगभग 1100 फ़लस्तीनियों की मौत हो गई थी. उस हमले को लेकर इसराइल का कहना था कि उसका उद्देश्य दक्षिणी इसराइल पर फ़लस्तीनी चरमपंथियों के रॉकेट हमले रोकना था. रेड क्रॉस के मुताबिक़ ग़ज़ा के लोग उस हमले की वजह से बिखरी ज़िंदगी को समेट नहीं पा रहे हैं और लगातार निराशा में घिरते जा रहे हैं. इसराइली हमलों में जो क्षेत्र नष्ट हुए हैं उनके पुनर्निर्माण के लिए सीमेंट या स्टील उपलब्ध ही नहीं है.

इसराइली घेराबंदी

गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को ज़रूरी इलाज मुहैया नहीं हो पा रहा है. पानी की आपूर्ति कभी रहती है कभी नहीं, साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था तो लगभग ध्वस्त होने के कगार पर है. रेड क्रॉस ने वहाँ ग़रीबी के स्तर को 'काफ़ी गंभीर' बताया है. वहाँ बड़ी संख्या में बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रेड क्रॉस के अनुसार ये सब ग़ज़ा की इसराइली घेराबंदी से जुड़े हुए मसले हैं. ग़ज़ा पर दो साल पहले हमास ने नियंत्रण कर लिया था और उसके बाद से ही इसराइल ने उस इलाक़े की घेराबंदी कर रखी है. इस रिपोर्ट के बाद इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यमिन नेतन्याहू के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि ग़ज़ा में आम लोग जिन मुश्किलों का सामना कर रहे हैं उसके लिए मुख्य रूप से हमास ज़िम्मेदार है. साथ ही उनके मुताबिक़ ये बात विश्वास के लायक़ नहीं है कि अगर उस इलाक़े के लोगों को निर्माण कार्य के लिए चीज़ें दी जाएँगी तो वो सैनिक मशीनें बनाने के लिए हमास के पास नहीं पहुँच जाएँगी.