दबाव अब भारत पर होगा

हिलैरी क्लिंटन
Image caption हिलैरी क्लिंटन का ये दौरा भारत-पाकिस्तान रिश्तों के लिए भी काफ़ी अहम है.

कुछ ही महीनों पहले अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने वाशिंगटन में कहा था कि पाकिस्तान का अस्तित्व ख़तरे में है और उसे ये समझना होगा कि ये ख़तरा भारत से नहीं बल्कि तालेबान जैसे चरमपंथी गुटों से है.

इस पर वाशिंगटन में मौजूद भारत-पाकिस्तान रिश्तों के कई जानकारों का यही कहना था कि पाकिस्तान को इस बात का यकीन अमरीका नहीं बल्कि भारत ही दिला सकता है.

हिलेरी क्लिंटन का ये भारत दौरा इस मायने में काफ़ी अहमियत रखता है.

कैमरे के सामने, संवाददाता सम्मेलनों में बातें ज़रूर रक्षा समझौतों की हो रही हैं, परमाणु भट्टियों की हो रही हैं, ग्रीनहाउस गैसों में कटौती की हो रही है, आतंकवाद के ख़िलाफ़ भारत और अमरीका की साझेदारी की हो रही है लेकिन पर्दे के पीछे ओबामा प्रशासन की कोशिश होगी कि भारत के तरफ़ से उसे वैसे सुर सुनाई पड़ें जो पाकिस्तान को भी सुकून पहुंचाए.

कश्मीर के मुद्दे पर अपने कदम वापस खींचकर, पाकिस्तान के दबाव के बावजूद रिचर्ड हॉलब्रूक को दक्षिण एशिया का नहीं बल्कि केवल अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान का ख़ास दूत बनाकर ओबामा प्रशासन ने काफ़ी हद तक भारतीय संवेदनशीलता का ध्यान रखा है.

लेकिन उससे भी ज़्यादा अहम है इस दौरे में हिलैरी क्लिंटन का पाकिस्तान नहीं जाना क्योंकि ये दर्शाता है कि ये प्रशासन भारत और पाकिस्तान को एक ही तराजू के दो पलड़ों की तरह नहीं देख रहा.

पाकिस्तान में बेचेनी

इस से पाकिस्तान में बेचैनी काफ़ी बढ़ी हुई है ये बात किसी से छिपी नहीं है और शायद इसलिए हिलेरी क्लिंटन ने इस दौरे पर निकलने से पहले पाकिस्तानी अख़बार डॉन के साथ हुई बातचीत में स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि वो अगस्त के बाद पाकिस्तान के दौरे पर भी जाएंगी.

आज का अमरीका आज के भारत को एक आर्थिक साझेदार, एक उभरती ताक़त के तौर पर देख रहा है लेकिन अल क़ायदा और तालिबान से घिरा परमाणु हथियारों से लैस पाकिस्तान भी उसके लिए ख़ासी अहमियत रखता है.

हिलेरी क्लिंटन इस दौरे पर आतंकवाद के ख़िलाफ़ पाकिस्तान से और सख़्त कदम की उम्मीद जैसी बातें ज़रूर करेंगी लेकिन इसके बदले हिलैरी क्लिंटन की उम्मीद होगी कि भारतीय पक्ष शांति वार्ता को आगे बढ़ाए और शर्म अल शेख में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूसूफ़ रज़ा गिलानी की मुलाक़ात मुमकिन है कि उसी दिशा में उठाया गया कदम हो.

ज़रदारी सरकार ने इसी दौरे के समय मुंबई हमलों में पाकिस्तान नागरिकों के शामिल होने की बात स्वीकार करके और उनके ख़िलाफ़ उठाए गए कदमों का ऐलान करके ये भी इशारा किया है कि वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ गंभीर हैं.

हिलैरी क्लिंटन ने दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों से बातचीत के दौरान ये भी कहा है कि उन्हें इस बात का पूरा भरोसा है कि पाकिस्तान पूरी लगन से आतंकवाद के ख़िलाफ़ जुटा हुआ है.

ऐसे में अब भारत पर दबाव बढ़ता है कि वो चुप्पी तोड़े और पाकिस्तान के साथ रिश्तों को बेहतर करने की तरफ कदम उठाए.

ये अलग बात है कि मुंबई हमलों पर भारत पाकिस्तान की तरफ़ से जैसी कार्रवाई चाहता है उसमें उसे कामयाबी नहीं मिली है और किसी भी नरम रवैया को विपक्ष सरकार की कमज़ोरी की तौर पर पेश करने में शायद ही चूकेगा.

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