अहमदीनेजाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली

ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए हुए विवादास्पद चुनाव के कई हफ़्तों बाद महमूह अहमदीनेजाद ने बुधवार को दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ ली है.

Image caption अहमदीनेजाद का दूसरा कार्यकाल चुनौतियों से भरा हुआ दिख रहा है

विपक्ष ने इस चुनाव के परिणामों का विरोध किया था. बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच संसद के बाहर विपक्ष के कुछ समर्थक जमा हुए और एक जगह तो प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर भी किया गया.

अहमदीनेजाद ने शपथ ग्रहण के बाद संसद को संबोधित करते हुए इन चुनावों को 'ईरान में हुई महान घटनाओं' की संज्ञा दी है.

ईरान में 12 जून को राष्ट्रपति पद के चुनाव हुए थे और इसके परिणाम आने के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 30 लोग मारे गए थे.

उधर जर्मनी, फ़्रांस, ब्रिटेन और अमरीका पहले ही कह चुके हैं कि वे अहमदीनेजाद को बधाई संदेश नहीं भेजेंगे.

'सरकार के गठन में मुश्किलें'

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि संसद के बाहर एक जगह जमा हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने पैपर गेस के इस्तेमाल से तितर-बितर किया है.

बीबीसी के तेहरान संवाददाता का कहना है कि ऐसा संभव है कि राष्ट्रपति अहमदीनेजाद को सरकार के गठन में परेशानी हो क्योंकि हाल-फ़िलहाल में उनके कई कट्टरपंथी राजनीतिक नेताओं से मतभेद रहे हैं, जो वैसे उनके समर्थक हो सकते थे.

अहमदीनेजाद को दो हफ़्तों के भीतर अपनी सरकार का गठन करना होगा और उस पर संसद की मज़ूरी लेनी होगी.

Image caption विपक्ष ने चुनाव परिणामों का व्यापक विरोध किया था और सरकार ने कड़ी कार्रवाई की थी

बीबीसी के तेहरान संवाददाता जॉन लीन का कहना है कि एक स्वीकार्य और विश्वसनीय सरकार का गठन राष्ट्रपति के लिए अब बड़ी चुनौती है.

हाल के हफ़्तों में राष्ट्रपति अहमदीनेजाद कई तरह के विवादों में रहे हैं. रुढ़िवादी नेता अहमदीनेजाद के समर्थक माने जाते रहे हैं लेकिन इस दौरान उनसे भी कई मतभेद उभर कर आए हैं.

'सही विजेता'

सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला ख़ामनेई ने राष्ट्रपति के रुप में सोमवार को अहमदीनेजाद के नाम की पुष्टि की थी. वैसे विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों के बीच भी ख़ामनेई ने अहमदीनेजाद का समर्थन किया था.

उनका कहना है कि अहमदीनेजाद ही सही विजेता हैं और मतदाताओं ने न्याय के पक्ष में और अक्खड़पन के ख़िलाफ़ मत दिया है.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब सोमवार को आयतुल्ला ख़ामनेई ने अहमदीनेजाद की राष्ट्रपति के रुप में पुष्टि की तो सुरक्षा बलों ने सैकड़ों विपक्षी कार्यकर्ताओं को तेहरान में प्रदर्शन नहीं करने दिया.

अहमदीनेजाद से पहले राष्ट्रपति रह चुके मोहम्मद ख़ातमी और अकबर हाशमी रफ़संजानी ने भी इस समारोह में हिस्सा नहीं लिया था.

इस समारोह में जो दो लोग और नहीं थे, वे थे, चुनाव में अहमदीनेजाद के हाथों पराजित हुए मीर हुसैन मुसावी और मेहदी करौबी.

मेहदी करौबी ने मंगलवार को कहा था कि न तो उन्होंने और न ही मुसावी ने चुनाव परिणामों का विरोध करना बंद किया है. उनका कहना था कि उनका विरोध जारी रहेगा.

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